कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला (फोटो- सोशल मीडिया) 
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UNSC में पाकिस्तान की जिम्मेदारी से देश की सियासत गरम, कांग्रेस का सरकार पर हमला

कांग्रेस ने पाकिस्तान को UNSC अध्यक्ष बनाए जाने को भारत की कूटनीतिक हार बताया और मोदी सरकार की विदेश नीति व चुप्पी पर सवाल उठाए। सुरजेवाला ने इसे बड़ी विफलता करार दिया।

सौरभ शर्मा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान को अध्यक्षता मिलने के बाद भारत में सियासी तूफान खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने इस नियुक्ति को भारत की कूटनीतिक विफलता बताया और मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि एक ऐसा देश जो आतंक का पनाहगार रहा है, अब वैश्विक मंच पर सुरक्षा की कमान संभाल रहा है। उन्होंने पूछा, जब पाकिस्तान को आतंकवाद रोधी समिति में भी जगह मिली, तब भारत चुप क्यों रहा?

यूएनएससी के लिए जुलाई महीने की अध्यक्षता पाकिस्तान को मिली है। इसके अलावा उसे तालिबान प्रतिबंध समिति का अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद रोधी समिति का उपाध्यक्ष भी बनाया गया है। पाकिस्तान जनवरी 2025 से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गैर-स्थायी सदस्य है। कांग्रेस का कहना है कि यह भारत की विदेश नीति की कमजोरी का प्रतीक है और सरकार ने इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी।

सुरजेवाला बोले- आतंक फैलाने वाला बना सुरक्षा संरक्षक

बंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि पाकिस्तान का इतिहास भारत पर आतंकी हमलों का रहा है और अब वही देश वैश्विक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाएगा। उन्होंने हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले को पाकिस्तान प्रायोजित बताते हुए कहा कि ऐसे देश को सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष बनाना चिंताजनक है। उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर पर विदेश नीति को केवल भाषणों और फोटो तक सीमित रखने का आरोप लगाया।

सरकार की चुप्पी पर कांग्रेस के तीखे सवाल

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि सरकार ने 4 जून को जब पाकिस्तान को आतंकवाद रोधी समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया, तब भी कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। कांग्रेस ने पूछा कि भारत ने क्या प्रयास किए ताकि पाकिस्तान को इस जिम्मेदारी से रोका जा सके? इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की कूटनीति के कारण भारत अपने पड़ोसी देशों से भी दूर होता जा रहा है।

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कांग्रेस ने यह भी कहा कि आज भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग महसूस कर रहा है। नेपाल, मालदीव, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देश भी अब पहले जैसे भरोसेमंद नहीं रहे। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार इस कूटनीतिक हार पर संसद और देश के सामने सफाई दे।

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