गौरव गोगोई (सोर्स- सोशल मीडिया) 
देश

'लोकतंत्र को बचाने के लिए ऐसा करना पड़ा', ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बोले गौरव गोगोई

No Confidence Motion: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि यह कदम लोकतंत्र और सदन की गरिमा बचाने के लिए उठाया गया है।

सजल रघुवंशी

Gaurav Gogoi On Om Birla: लोकसभा में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि यह कदम व्यक्तिगत कारणों से नहीं बल्कि लोकतंत्र और संसद की गरिमा को बचाने के लिए उठाया गया है।

गौरव गोगोई ने कहा कि ओम बिरला के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं लेकिन संसद के नियमों और संविधान की रक्षा करना हर सांसद की जिम्मेदारी है। गोगोई ने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि संसदीय मर्यादा को बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है।

संसद की गरिमा बचाने के लिए जरूरी कदम- गौरव गोगोई

गौरव गोगोई ने सदन में कहा कि हर सांसद का कर्तव्य है कि वह संसद की गरिमा, मर्यादा और नियमों की रक्षा करे। इसी जिम्मेदारी के तहत विपक्ष को यह कदम उठाना पड़ा है।

साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष स्पीकर पर व्यक्तिगत हमला नहीं करना चाहता लेकिन लोकतंत्र में लोगों का विश्वास कायम रखना जरूरी है। विपक्ष का कहना है कि सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता बनाए रखना स्पीकर की जिम्मेदारी होती है और इसी मुद्दे को लेकर यह प्रस्ताव लाया गया है।

118 विपक्षी सांसदों का समर्थन

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने औपचारिक रूप से अविश्वास प्रस्ताव सदन में पेश किया। बताया गया कि इस प्रस्ताव पर विपक्ष के 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। विपक्षी दलों का कहना है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे असंतोष बढ़ गया और अंततः अविश्वास प्रस्ताव लाने की नौबत आ गई।

सदन में कार्यवाही को लेकर उठा विवाद

ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश होने के बाद यह सवाल उठ गया कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन है, तब सदन की अध्यक्षता कौन करेगा। उस समय सदन की कार्यवाही जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में चल रही थी। इस पर औवेसी और सौगत रॉय ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाते हुए कहा कि ऐसे समय में स्पीकर या उनके द्वारा नामित व्यक्ति को कार्यवाही नहीं चलानी चाहिए। हालांकि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जगदंबिका पाल ने स्पष्ट किया कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए चेयर को कार्यवाही चलाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि ओम बिरला ने खुद इस बहस के दौरान सदन की अध्यक्षता न करने का फैसला लिया है।

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