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पुरुषों के मुकाबले आधे से भी कम कमा रही महिलाएं, जेंडर इक्वलिटी के मामले में 2 रैंक और पिछड़ा भारत

ग्लोबर जेंडर गैप की ओर से ग्लोबल जेंडर अंतर सूचकांक प्रकाशित किया गया। इस रैंकिग में दक्षिण एशिया में भारत वैश्विक लैंगिक अंतर सूचकांक में बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और भूटान के बाद पांचवें स्थान पर है, जबकि पाकिस्तान सबसे निचले पायदान पर है।

अंजू वशिष्ठ

नई दिल्ली: भारत की महिलाएं पुरुषों के मुकाबले कमाने में भी अभी भी पीछे हैं। भारत आर्थिक लैंगिक समानता में सबसे निचले स्तर वाले देशों की लिस्ट में है। इसके साथ ही विश्व आर्थिक मंच (ग्लोबल इकोनॉमिक फोरम) के ग्लोबल जेंडर अंतर सूचकांक में भारत दो पायदान नीचे खिसककर 129वें स्थान पर आ गया, जबकि आइसलैंड ने सूची में अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है।

बुधवार को ग्लोबल इकोनॉमिक फोरम की ओर से ग्लोबल जेंडर अंतर सूचकांक प्रकाशित किया गया। इस रैंकिग में दक्षिण एशिया में भारत वैश्विक लैंगिक अंतर सूचकांक में बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और भूटान के बाद पांचवें स्थान पर है, जबकि पाकिस्तान सबसे निचले पायदान पर है।

वैश्विक स्तर पर 146 देशों की इस सूची में सूडान सबसे निचले स्थान पर है, जबकि पाकिस्तान तीन स्थान नीचे खिसककर 145वें पायदान पर आ गया है। बांग्लादेश, सूडान, ईरान, पाकिस्तान और मोरक्को के साथ भारत कम आर्थिक समानता वाले देशों में शामिल है। इन सभी देशों में अनुमानित अर्जित आय में 30 प्रतिशत से कम लैंगिक समानता दर्ज की गई

भारतीय महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी

वहीं माध्यमिक शिक्षा में नामांकन के मामले में भारत ने सबसे अच्छी लैंगिक समानता दिखाई है, जबकि महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के मामले में देश वैश्विक सूची में 65वें स्थान पर है। पिछले 50 वर्षों में महिला/पुरुष राष्ट्राध्यक्षों के साथ समानता के मामले में भारत 10वें स्थान पर है।

इन जगहों पर पीछे रह गया भारत

डब्ल्यूईएफ के मुताबिक, 140 करोड़ से अधिक की आबादी वाले भारत का 2024 में लैंगिक अंतर 64.1 प्रतिशत रहा। भारत पिछले वर्ष 127वें स्थान पर था और सूची में दो पायदान नीचे जाने की मुख्य वजहों में 'शिक्षा प्राप्ति' और 'राजनीतिक सशक्तिकरण' मापदंडों में आई मामूली गिरावट है।

भारत में पुरुषों के मुकाबले 40 रुपये कमाती है महिलाएं

भारत की आर्थिक समानता 39.8 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि भारत में अगर पुरुष किसी काम के लिए 100 रुपये कमाते हैं, तो उसी काम के लिए महिलाएं औसतन हर 39.8 रुपये कमाती हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का आर्थिक समानता में स्कोर सुधार है। रिपोर्ट के मुताबिक 'आर्थिक भागीदारी' और 'अवसर' मापदंडों में थोड़ा सुधार हुआ है। डब्ल्यूईएफ ने कहा कि भारत में आर्थिक समानता पिछले चार वर्षों से ऊपर की ओर बढ़ रही है। अभी इसे साल 2012 के 46 फीसदी के स्तर पर लौटने के लिए 6.2 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी की जरूरत है।

बांग्लादेश सबसे निचली रैंक पर

इन आकंड़ों में बांग्लादेश की आर्थिक लैंगिक समानता सबसे निचले स्तर 31.1 प्रतिशत पर है। इन दो देशों के अलावा, सूडान में 33.7 प्रतिशत, ईरान में 34.3 प्रतिशत, पाकिस्तान में 36 प्रतिशत और मोरक्को में 40.6 प्रतिशत की आर्थिक लैंगिक समानता देखी गई।

(एजेंसी- इनपुट के साथ)

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