KGMU Study on TB: टीबी को लेकर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा हाल ही में एक विस्तृत अध्ययन जारी किया गया है। पांच वर्षों (2020-2024) के आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली इस रिसर्च में सामने आया है कि उम्र बढ़ने के साथ टीबी के मामले पुरुषों में जहां तेजी से बढ़ रहे हैं वहीं महिलाओं में इनमें कमी देखी गई है। यह अध्ययन बीएमसी जेरियाट्रिक्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन में कुल 41,751 टीबी रोगियों के डेटा का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने मरीजों को तीन आयु वर्गों में बांटा था: 0-18 वर्ष, 19-59 वर्ष और 60 वर्ष से अधिक। आंकड़ों के अनुसार 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में पुरुषों की भागीदारी सबसे अधिक 78.16% रही, जबकि महिलाओं की केवल 21.84% थी। वहीं, 19-59 वर्ष के आयु वर्ग में 66.66% पुरुष और 33.34% महिलाएं शामिल रहीं। बच्चों (0-18 वर्ष) में भी टीबी के मामलों में 61.92% पुरुष और 38.09% महिलाएं थीं।
केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख और नॉर्थ जोन टास्क फोर्स (राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन) के चेयरमैन प्रो. सूर्यकांत के अनुसार महिलाओं की तुलना में पुरुषों में टीबी के मामले अधिक होने के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण जिम्मेदार है।
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अध्ययन में एक सकारात्मक पहल उज्ज्वला योजना को भी महत्वपूर्ण माना गया है। इस योजना के तहत महिलाओं को स्वच्छ ईंधन (एलपीजी गैस) मिलने से उन्हें चूल्हे के धुएं से राहत मिली है जो फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों और टीबी का एक बड़ा कारण होता है।
रिसर्च में मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (एमडीआर-टीबी) का भी विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि बुजुर्ग मरीजों में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता अधिक है। यह दर बुजुर्गों में 9.38% थी जबकि वयस्कों में 8.36% और बच्चों में 7.05% पाई गई।
यह महत्वपूर्ण रिपोर्ट डॉ. दिव्या भट्ट, डॉ. रश्मि रत्नम, डॉ. फैसल अब्बास, डॉ. मनु सिंह, डॉ. उर्मिला सिंह और डॉ. पारुल जैन की टीम द्वारा तैयार की गई है जो टीबी उन्मूलन की दिशा में नई जानकारी प्रदान करती है।