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यश चोपड़ा को हिंदी सिनेमा का किंग ऑफ रोमांस कहा जाता है।
यश चोपड़ा ने 1993 की फिल्म डर में शाहरुख खान को जुनूनी आशिक के किरदार में पेश किया था।
दीवार, कभी-कभी, त्रिशूल और काला पत्थर जैसी फिल्मों ने यश चोपड़ा की पहचान मजबूत की।
Yash Chopra Death Anniversary Special: यश चोपड़ा को बॉलीवुड का 'किंग ऑफ रोमांस' कहा जाता था। उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए प्यार, जुदाई और रिश्तों को पर्दे पर ऐसे पेश किया कि उनकी कहानियां दर्शकों के दिलों में बस गईं। लेकिन यश चोपड़ा की खासियत सिर्फ रोमांटिक फिल्में बनाना नहीं थी। उन्होंने 'डर' में शाहरुख खान को एक ऐसे जुनूनी आशिक के रूप में पेश किया, जिसने प्यार और सनक के बीच की खतरनाक रेखा को दिखाया।
यश चोपड़ा का जन्म 27 सितंबर 1932 को लाहौर में हुआ था। उनका पूरा नाम यश राज चोपड़ा था। फिल्मों के प्रति उनका लगाव उन्हें फिल्ममेकिंग की दुनिया में ले आया। उन्होंने अपने बड़े भाई बी.आर. चोपड़ा के साथ काम करके निर्देशन की बारीकियां सीखीं। साल 1959 में फिल्म 'धूल का फूल' से उन्होंने निर्देशन की शुरुआत की। इसके बाद 'धर्मपुत्र' और 'वक्त' जैसी फिल्मों ने उन्हें एक प्रतिभाशाली निर्देशक के रूप में पहचान दिलाई।
यश चोपड़ा ने 1973 में अपना प्रोडक्शन हाउस यश राज फिल्म्स शुरू किया। इसी साल उनकी फिल्म 'दाग' रिलीज हुई। इसके बाद 'दीवार', 'कभी-कभी', 'त्रिशूल' और 'काला पत्थर' जैसी फिल्मों ने उनकी प्रतिभा को साबित किया। उन्होंने अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों को दमदार किरदारों में पेश किया और गंभीर विषयों पर भी यादगार फिल्में बनाईं।
साल 1993 में रिलीज हुई 'डर' यश चोपड़ा के करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल है। इसमें शाहरुख खान ने राहुल मेहरा का किरदार निभाया था, जो किरण यानी जूही चावला के प्यार में इस कदर जुनूनी हो जाता है कि उसका पीछा करने लगता है। फिल्म में सनी देओल भी अहम भूमिका में थे।
उस दौर में शाहरुख को नकारात्मक किरदार में पेश करना एक अलग प्रयोग था। यश चोपड़ा के निर्देशन में शाहरुख ने जुनून, डर और सनक से भरे किरदार को प्रभावशाली ढंग से निभाया। इसके बाद 'दिल तो पागल है', 'वीर-जारा' और 'जब तक है जान' जैसी फिल्मों ने रोमांस के प्रति उनकी खास समझ को फिर साबित किया।
भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए यश चोपड़ा को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। उन्होंने 'जब तक है जान' को अपने निर्देशन की आखिरी फिल्म बताया था। 21 अक्टूबर 2012 को उनका निधन हो गया। उनकी आखिरी निर्देशित फिल्म नवंबर 2012 में रिलीज हुई। आज भी उनकी फिल्में और प्रेम कहानियां दर्शकों को याद दिलाती हैं कि यश चोपड़ा ने हिंदी सिनेमा में रोमांस को एक अलग पहचान दी।