यामी गौतम (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
मनोरंजन

दशहरे के मौके पर फीकी पड़ी यामी गौतम की 'नयी नवेली', कमजोर कहानी और लचर निर्देशन ने किया निराश

Nayi Naveli Movie Review: दशहरा के मौके पर रिलीज हुई फिल्म 'नयी नवेली' में यामी गौतम धर मुख्य भूमिका में हैं और इसका निर्देशन बालाजी मोहन ने किया है। नवभारत लाइव इस फिल्म को 1.5 स्टार्स देता है।

यति सिंह

Highlights

  • यामी गौतम की एक्टिंग के बाद भी कमजोर कहानी फिल्म का प्रभाव घटाती है।

  • धीमी रफ्तार, अनुमानित घटनाक्रम और औसत म्यूजिक फिल्म की प्रमुख कमियां हैं।

  • फिल्म का विषय दिलचस्प है, लेकिन डायरेक्शन और प्रस्तुति उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती।

Yami Gautam Nayi Naveli Film Rating: दशहरा के पावन और उत्सवी माहौल में सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली यामी गौतम धर स्टारर फिल्म 'नयी नवेली' त्यौहार के इस मौसम में दर्शकों को हर मोर्चे पर निराश करती है। फिल्म की कहानी एक नवविवाहिता के जीवन, उसकी नई-नवेली शादीशुदा जिंदगी की चुनौतियों और उसके आसपास घटने वाले पारिवारिक व सामाजिक घटनाक्रमों के इर्द-गिर्द घूमती है।

हालांकि, जिस विषय को पर्दे पर बेहद संवेदनशीलता और मनोरंजन के साथ पेश किया जा सकता था, वह बेहद कमजोर पटकथा और दिशाहीन निर्देशन की भेंट चढ़ गया। जिस त्योहारी वीकेंड में दर्शक सिनेमाघरों से एक मनोरंजक, ऊर्जावान और प्रभावशाली सिनेमा की उम्मीद करते हैं, वहां यह फिल्म एक बेहद उबाऊ, धीमी और थकाऊ यात्रा बनकर रह जाती है।

कमजोर पटकथा और बेदम डायलॉग्स का जाल

फिल्म का सबसे कमजोर और निराशाजनक पहलू इसका स्क्रीनप्ले (पटकथा) और संवाद लेखन है। कहानी में न तो कोई नयापन है और न ही कोई ऐसा मोड़ जो दर्शकों को अपनी कुर्सी से बांधकर रख सके। घटनाक्रम इतने अनुमानित हैं कि दर्शक आगे होने वाले दृश्यों का अंदाजा पहले से ही लगा लेते हैं। हालांकि, मुख्य अभिनेत्री के रूप में यामी गौतम ने अपने अभिनय कौशल से अपने किरदार में जान फूंकने और ढीली पटकथा को संभालने की पूरी कोशिश की है।

लेकिन एक बेजान और बेहद लचर कहानी के सामने उनका व्यक्तिगत प्रयास भी फिल्म को डूबने से नहीं बचा पाता। फिल्म में एक भी ऐसा दृश्य या संवाद नहीं बन पाता जो सिनेमाघर से बाहर निकलने के बाद दर्शकों के जेहन में याद रह जाए। वहीं, सहयोगी कलाकारों का अभिनय भी बेहद सतही, बेमन का और प्रभावहीन नजर आता है, जिससे किरदारों के बीच कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं बन पाता।

फेसटिवल वीकेंड पर दर्शकों के लिए निराशाजनक सौदा

तकनीकी और रचनात्मक मोर्चे पर भी फिल्म पूरी तरह से फीकी साबित होती है। फिल्म का निर्देशन बेहद बिखरा हुआ है और ऐसा प्रतीत होता है कि निर्देशक के पास कहानी को पर्दे पर प्रस्तुत करने की कोई स्पष्ट सोच या विजन नहीं था। सम्पादन (एडिटिंग) के स्तर पर भी फिल्म काफी ढीली है, जिससे कई दृश्य बेवजह खिंचे हुए महसूस होते हैं।

फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर बेहद औसत दर्जे का है, जो किसी भी महत्वपूर्ण या भावनात्मक दृश्य के प्रभाव को बढ़ाने में पूरी तरह विफल रहता है। त्योहारी सीजन में रिलीज होने के बावजूद फिल्म में वह चमक-दमक या सिनेमाई खिंचाव नदारद है जिसकी उम्मीद दर्शक टिकट खिड़की पर करते हैं।

कुल मिलाकर फिल्म 'नयी नवेली' एक ऐसी फिल्म है जो विचारों, पटकथा और निर्देशन की स्पष्टता के पूर्ण अभाव से जूझती है। यदि आप इस त्योहारी वीकेंड पर अपने परिवार या दोस्तों के साथ सिनेमाघरों का रुख करने का मन बना रहे हैं, तो 'नयी नवेली' आपको एक बेहद निराशाजनक अनुभव दे सकती है।

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