महान गायक मुकेश (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)  
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सिंगिंग के साथ एक्टिंग में भी आजमाया हाथ, मुकेश की आवाज आज भी करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों में है जिंदा

Mukesh Birth Anniversary: महान गायक मुकेश ने अपनी दर्दभरी आवाज से हिंदी सिनेमा को कई सदाबहार गीत दिए। दोस्त-दोस्त न रहा, आवारा हूं और मेरा जूता है जापानी जैसे गीत आज भी लोकप्रिय हैं।

सोनाली झा

Mukesh Birth Anniversary Special Story: हिंदी सिनेमा के महान पार्श्व गायकों में शुमार मुकेश की आवाज आज भी करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजती है। 22 जुलाई 1923 को जन्मे मुकेश ने अपने दर्द भरे गीतों और भावपूर्ण गायकी से भारतीय संगीत को नई पहचान दी। उनका असली नाम मुकेश चंद माथुर था। लगभग चार दशक लंबे करियर में उन्होंने ऐसे गीत गाए, जो आज भी सदाबहार माने जाते हैं। उनकी गायकी की खास बात यह थी कि हर गीत सीधे श्रोताओं के दिल तक पहुंचता था।

मुकेश का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता जोरावर चंद माथुर पेशे से इंजीनियर थे। दस भाई-बहनों में मुकेश छठे नंबर पर थे। बचपन से ही उन्हें संगीत का बेहद शौक था और वह अक्सर अपने दोस्तों और सहपाठियों को गाने सुनाया करते थे। दसवीं कक्षा के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और नौकरी करने लगे।

मुकेश का फिल्मी करियर

मुकेश की जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब अपने रिश्तेदार और अभिनेता मोतीलाल की बहन की शादी में उन्होंने गाना गाया। उनकी आवाज से प्रभावित होकर मोतीलाल उन्हें मुंबई ले आए और संगीत की विधिवत ट्रेनिंग दिलवाई। यहीं से उनके फिल्मी करियर की शुरुआत हुई। मुकेश ने अपने पहले गीत 'दिल ही बुझा हुआ हो तो' से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। गायकी के साथ अभिनय में भी आजमाया हाथ

इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

मुकेश ने गायकी के अलावा माशूका, आह, अनुराग और दुल्हन जैसी फिल्मों में अभिनय भी किया। हालांकि, उन्हें सबसे ज्यादा सफलता पार्श्व गायन में मिली। उन्होंने आवारा हूं, मेरा जूता है जापानी, दोस्त-दोस्त न रहा, जीना यहां मरना यहां, दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई और कहता है जोकर जैसे कई अमर गीत गाए। उनकी आवाज राज कपूर की फिल्मों की पहचान बन गई और दोनों की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार गीत दिए।

स्टेज शो के दौरान दुनिया को कहा अलविदा

मुकेश ने अपने लगभग 40 साल लंबे करियर में 200 से अधिक गीत गाए और देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी गायकी का जादू बिखेरा। 27 अगस्त 1976 को अमेरिका में एक स्टेज शो के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उनका निधन हो गया। उनके जाने के बाद भी उनकी आवाज अमर रही। आज भी जब 'दोस्त-दोस्त न रहा', 'आवारा हूं' या 'इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल' जैसे गीत बजते हैं, तो मुकेश की यादें ताजा हो जाती हैं।

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