स्टालिन संग राहुल गांधी, फोटो- सोशल मीडिया 
विधानसभा चुनाव 2026

तमिलनाडु के चुनावी मैदान से क्यों दूर हैं राहुल गांधी, क्या ये DMK-कांग्रेस गठबंधन में दरार की सुगबुगाहट है?

Rahul Gandhi Campaign: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए मतदान में अब 9 दिन से भी कम का समय बचा है, लेकिन राहुल गांधी की गैर-मौजूदगी ने डीएमके-कांग्रेस गठबंधन की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रतीक पाण्डेय

Rahul Gandhi @ Tamil Nadu: तमिलनाडु की राजनीति इस समय अपने सबसे दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। 23 अप्रैल को होने वाले मतदान की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे चुनावी सरगर्मी तेज होती जा रही है। एक तरफ राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर टीवीके प्रमुख विजय भी अपनी पूरी ताकत झोंकते दिखाई दे रहे हैं।

लेकिन इस पूरे शोर-शराबे के बीच राजनीतिक हलकों में सिर्फ एक ही चर्चा है कि आखिर कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे राहुल गांधी अब तक मैदान में क्यों नहीं उतरे हैं। गठबंधन के भविष्य और एकजुटता को लेकर उठ रहे इन सवालों ने तमिलनाडु की सियासी हवा में एक अजीब सी बेचैनी घोल दी है।

चुनावी रैलियों से राहुल गांधी की दूरी का असली राज क्या?

आमतौर पर देखा गया है कि जहां भी कांग्रेस जब किसी दल के साथ गठबंधन में होती है, वहां राहुल गांधी स्टार प्रचारक के तौर पर सबसे आगे रहते हैं। लेकिन तमिलनाडु के मौजूदा परिदृश्य में ये तस्वीर काफी धुंधली दिखाई दे रही है। अब मतदान होने में नौ दिन का समय बचा है, फिर भी कांग्रेस खेमे की तरफ से राहुल गांधी के कार्यक्रमों को लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं शेयर की जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के इस निर्णायक मोड़ पर राहुल गांधी का गायब रहना केवल उनकी निजी पसंद नहीं बल्कि गठबंधन की आंतरिक खटास का संकेत हो सकता है।

स्टालिन और राहुल गांधी के बीच आखिर क्यों बढ़ीं दूरियां

पिछले कुछ हफ्तों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो डीएमके और कांग्रेस के बीच तालमेल की भारी कमी साफ दिखाई देती है। हैरत की बात तो यह है कि पुदुचेरी में एक ही दिन मौजूद होने के बावजूद दोनों दिग्गजों ने अलग-अलग रैलियां कीं और मंच शेयर करने से बचते नजर आए। चेन्नई और कोयंबटूर जैसे महत्वपूर्ण शहरों में भी किसी कंबाइंड रोड शो या बड़ा कार्यक्रम नहीं किया गया। सीट बंटवारे के समय उभरे मतभेद भले ही उस समय सुलझा लिए गए हों, लेकिन अब चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में यह दूरी विपक्षी दलों को हमला करने का सुनहरा मौका दे रही है।

गठबंधन के भीतर बढ़ती बेचैनी

डीएमके के शीर्ष नेताओं के भीतर राहुल गांधी की अनुपस्थिति को लेकर एक गहरा डर घर कर गया है। उन्हें लगता है कि अगर कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व उनके साथ मंच शेयर नहीं करता है, तो जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है।

विपक्ष इस स्थिति का फायदा उठाकर एक नया नैरेटिव गढ़ने की कोशिश में जुटा है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के अपने कार्यकर्ताओं के बीच भी भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय नेता तो दावा कर रहे हैं कि राहुल जल्द ही तमिलनाडु आएंगे, लेकिन दिल्ली में बैठे वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी ने जमीनी स्तर पर काम कर रहे लोगों के मनोबल को कमजोर कर दिया है।

हार जीत का बड़ा समीकरण

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर राहुल गांधी आखिरी एक-दो दिनों में तमिलनाडु आते भी हैं, तो क्या उनके पास चुनावी माहौल को गठबंधन के पक्ष में मोड़ने के लिए पर्याप्त समय होगा। राजनीति में समय का महत्व सबसे अधिक होता है और विपक्ष पहले ही काफी बढ़त बना चुका है। डीएमके-कांग्रेस के प्रत्याशियों को डर है कि शीर्ष नेतृत्व के बीच समन्वय की यह कमी उनके वोटों पर भारी पड़ सकती है। अगर राहुल गांधी का दौरा केवल एक रस्म अदायगी बनकर रह गया, तो इससे गठबंधन की एकजुटता के दावों को बड़ा झटका लग सकता है जिसका सीधा फायदा विरोधी खेमे को मिलेगा।

RSS शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव 2026 LIVE: नागपुर में मोहन भागवत ने किया शस्त्र पूजन

Weather Alert: 17 राज्यों में बारिश और आंधी का अलर्ट, दिल्ली-यूपी तक बिगड़ेगा मौसम, IMD ने जारी की चेतावनी

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कैप्टन स्मित की तारीफ की, कहा- हिंदू स्वभाव को दिखाया

विजया दशमी पर लागू हो रहा भारत-न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड समझौता, 21 सितंबर को हुई थी घोषणा

इंद्रप्रस्थ की रामलीला में PM मोदी करेंगे रावण दहन, सुरक्षा में तैनात किए गए 2,000 से अधिक जवान, 150 ड्रोन