Sonam Wangchuk Health Update Hospital Releases Health Bulletin: राजधानी दिल्ली में चल रहे भारी विरोध प्रदर्शन के बीच अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत को लेकर बड़ी खबर आई है। सफदरजंग अस्पताल ने मंगलवार सुबह भूख हड़ताल के 23वें दिन उनकी सेहत को लेकर एक नया और अहम हेल्थ बुलेटिन जारी कर दिया है। इस मेडिकल बुलेटिन में बताया गया है कि उनके शरीर के जरूरी पैमाने अभी स्थिर हैं लेकिन ब्लड शुगर का स्तर कम बना हुआ है। डॉक्टरों की एक विशेष टीम अस्पताल में चौबीसों घंटे लगातार उनकी बहुत ही बारीकी से निगरानी कर रही है ताकि कोई खतरा न हो।
VMMC और सफदरजंग अस्पताल के साथ-साथ एम्स दिल्ली के वरिष्ठ और विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम मिलकर उनका उचित इलाज कर रही है। बुलेटिन के मुताबिक रात में लिए गए उनके ब्लड सैंपल की विस्तृत जांच में सीरम पोटैशियम का स्तर 3.2 एमईक्यू/एल पाया गया है। यह पोटैशियम स्तर एक सामान्य और स्वस्थ इंसान के शरीर के मुकाबले काफी कम है जो कि उनके लिए गंभीर चिंता का विषय है। लगातार कई दिनों से चल रहे इस लंबे अनशन के कारण उनके शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर भारी और गंभीर दबाव पड़ रहा है।
अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार उन्हें पैंसाइटोपेनिया जैसी गंभीर बीमारी की बहुत बड़ी दिक्कत भी लगातार बनी हुई है। इसका सीधा मतलब यह है कि उनके शरीर में खून की बहुत भारी कमी हो गई है जो कि स्वास्थ्य के लिए काफी ज्यादा खतरनाक है। इसके अलावा उनके शरीर में वाइट ब्लड सेल्स की संख्या भी सामान्य से बहुत ज्यादा कम हो गई है जिससे भयानक संक्रमण का डर है। डॉक्टरों का कहना है कि इन सभी स्वास्थ्य कारणों की वजह से बार-बार खून की विस्तृत जांच करते रहना बेहद जरूरी हो गया है।
मेडिकल बुलेटिन के अनुसार फिलहाल वांगचुक को ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी यानी ओआरएस (ORS) का घोल नियमित रूप से पीने के लिए दिया जा रहा है। इसके अलावा उनके शरीर में पोटैशियम की भारी कमी को पूरा करने के लिए उन्हें मुंह से दवा भी विशेष रूप से दी जा रही है। लेकिन डॉक्टरों की बार-बार दी जा रही सलाह के बावजूद वे इलाज के कई अन्य जरूरी तरीकों को मानने से पूरी तरह इनकार कर रहे हैं। वे इंट्रावीनस यानी नस के जरिए दिए जाने वाले तरल पदार्थ और ग्लूकोज लेने से अस्पताल प्रशासन को साफ तौर पर मना कर रहे हैं।
सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट बताया है कि वांगचुक में हल्के से मध्यम स्तर की डिहाइड्रेशन की समस्या बनी हुई है। उनके शरीर में पानी की भारी कमी साफ देखी गई है और उनकी मेडिकल जांच रिपोर्ट में लगातार कई तरह की गड़बड़ियां भी सामने आ रही हैं। लंबे समय से चल रहे इस कठोर उपवास के कारण उनके शरीर और स्वास्थ्य पर बहुत ही भारी और गंभीर रूप से दबाव पड़ रहा है। इसी वजह से डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में उन्हें रखना बेहद जरूरी बताया जा रहा है ताकि सही समय पर उनका पूरा इलाज हो सके।
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सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने यह पूरी तरह से साफ कर दिया है कि उन्हें हर जरूरी मेडिकल सुविधा लगातार और बिना किसी रुकावट के दी जा रही है। उनकी नाजुक हालत पर विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा लगातार नजर रखी जा रही है और आगे का इलाज उनकी सेहत में सुधार पर ही निर्भर करेगा।
वहीं दूसरी तरफ अभिजीत दिपके फिर से जंतर-मंतर के धरना स्थल पर पहुंच गए हैं और उनके साथ करीब 100 लोग अभी भी मौजूद हैं। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच इस विवाद का क्या अंतिम हल निकलेगा, यह तो अब आने वाला वक्त ही पूरी तरह से स्पष्ट कर पाएगा।