नया स्मार्ट पीडीएस पोर्टल शुरू नहीं होने से लोगों की परेशानी बढ़ी।
रायपुर जिले में 721 राशन दुकानें संचालित हैं।
करीब 6.63 लाख राशन कार्डधारियों को हर महीने खाद्यान्न वितरित।
खाद्य विभाग का पुराना पोर्टल बंद होने से राशन कार्ड से जुड़े काम ठप।
Ration card portal closed in Raipur: सरकारी राशन कार्ड बनवाने और उसमें परिवार के सदस्यों के नाम जुड़वाने के लिए इंतजार कर रहे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। खाद्य विभाग का पुराना पोर्टल बंद होने और नया स्मार्ट पीडीएस पोर्टल शुरू नहीं होने से राशन कार्ड से जुड़े जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। इसका असर अब आयुष्मान कार्ड बनवाने पर भी पड़ रहा है। रायपुर जिले में राशन कार्ड बनाने, नाम जोड़ने और संशोधन से संबंधित 500 से अधिक आवेदन लंबित बताए जा रहे हैं।
स्थिति यह है कि लोग अपने आवेदन का निराकरण कराने के लिए नगर निगम के जोन कार्यालयों और खाद्य विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन नया पोर्टल शुरू नहीं होने के कारण उन्हें राहत नहीं मिल पा रही है। तकनीकी जांच पूरी होने और ऑनलाइन व्यवस्था बहाल होने का इंतजार किया जा रहा है।
राशन कार्ड में परिवार के सदस्यों का नाम दर्ज होना कई सरकारी सुविधाओं के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में जिन लोगों के नाम राशन कार्ड में नहीं जुड़ पाए हैं, उन्हें आयुष्मान कार्ड बनवाने में भी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र परिवारों को निर्धारित नियमों के अनुसार पांच लाख रुपये तक के उपचार की सुविधा मिलती है। ऐसे में दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रिया अटकने का सीधा असर पात्र लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच पर पड़ सकता है।
रायपुर जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का बड़ा नेटवर्क है। जिले की 721 राशन दुकानों में 299 शहरी और 422 ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हैं। इनके माध्यम से करीब 6.63 लाख राशन कार्डधारियों को हर महीने खाद्यान्न वितरित किया जाता है। इसके बावजूद नए राशन कार्ड बनवाने और पुराने कार्ड में जरूरी बदलाव कराने वाले आवेदकों को इंतजार करना पड़ रहा है।
जिला नियंत्रक खाद्य विभाग भूपेंद्र मिश्रा के अनुसार नए स्मार्ट पीडीएस पोर्टल को शुरू करने की तैयारी चल रही है। फिलहाल इसकी तकनीकी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद नए राशन कार्ड के लिए आवेदन करने, सदस्यों के नाम जोड़ने और संशोधन जैसे काम ऑनलाइन किए जा सकेंगे। अब लोगों की निगाहें पोर्टल शुरू होने पर टिकी हैं। सवाल यह है कि तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने में कितना समय लगेगा और लंबित आवेदनों का निराकरण कब तक होगा, ताकि पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।