रमई पाठ मंदिर (सोर्स- नवभारत)
गरियाबंद

गर्भवती माता सीता की प्रतिमा, स्त्री रूप में हनुमान, रहस्यों का अनूठा संगम है छत्तीसगढ़ का यह मंदिर

Gariaband Unique Temple: यहां गर्भवती माता सीता की प्रतिमा, स्त्री रूप में हनुमान जी की प्रतिमा और आम के पेड़ की जड़ से निकलने वाली जलधारा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

चंदू निर्मलकर

Highlights

  • आम के पेड़ की जड़ से निकलती जलधारा।

  • श्रद्धालुओं के लिए कौतूहल का विषय।

  • संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर दूर-दूर से पहुंचते हैं भक्त।

Chhattisgarh Ramai Path Temple Story: छत्तीसगढ़ की धरती पर कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जिनकी विशेषताएं लोगों को आश्चर्यचकित करती हैं। गरियाबंद जिले में फिंगेश्वर से छुरा मार्ग पर सोरिद खुर्द के पास स्थित रमई पाठ मंदिर भी ऐसा ही एक विशिष्ट धार्मिक स्थल है। यहां गर्भवती माता सीता की प्रतिमा, स्त्री रूप में हनुमान जी की प्रतिमा और आम के पेड़ की जड़ से निकलने वाली जलधारा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। धार्मिक मान्यताओं और प्राकृतिक विशेषताओं के कारण इस मंदिर की अलग पहचान है।

गर्भवती माता सीता की प्रतिमा बनी आस्था का केंद्र

मंदिर की सबसे चर्चित विशेषता गर्भवती माता सीता की प्रतिमा है। स्थानीय लोकमान्यता के अनुसार, इस स्थान का संबंध माता सीता के वनवास काल से जोड़ा जाता है। यही वजह है कि श्रद्धालु इस स्थल को रामायण की कथाओं से जोड़कर देखते हैं। माता सीता की प्रतिमा यहां आने वाले भक्तों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है।

रमई पाठ मंदिर

स्त्री रूप में हनुमान जी की प्रतिमा भी खास

मंदिर परिसर में स्त्री रूप में हनुमान जी की प्रतिमा भी विशेष आकर्षण है। धार्मिक परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं के चलते इस प्रतिमा को लेकर श्रद्धालुओं में जिज्ञासा बनी रहती है। मंदिर में स्थापित विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं इस स्थल की धार्मिक विशिष्टता को और बढ़ाती हैं।

आम के पेड़ की जड़ से निकलती है जलधारा

रमई पाठ मंदिर की एक अन्य विशेषता आम के पेड़ की जड़ के पास से निकलने वाली जलधारा है। श्रद्धालु इसे पवित्र मानते हैं। प्राकृतिक वातावरण के बीच बहती इस जलधारा को देखने के लिए भी लोग यहां पहुंचते हैं। जलधारा के स्रोत और सालभर इसके प्रवाह के संबंध में वैज्ञानिक जानकारी मिलने पर इस विशेषता को और विस्तार से समझा जा सकता है।

संतान प्राप्ति की कामना लेकर पहुंचते हैं भक्त

मंदिर को लेकर स्थानीय मान्यता है कि यहां संतान सुख की कामना से पूजा करने वाले श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर लोहे का झूला या सांकल चढ़ाते हैं। इसी परंपरा के कारण मंदिर की ख्याति आसपास के क्षेत्रों में भी है। हालांकि, यह धार्मिक आस्था और लोकविश्वास का विषय है।

नवरात्र में बढ़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

चैत्र और क्वार नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक गतिविधियां होती हैं। इस दौरान पूजा-अर्चना और मनोकामना ज्योति प्रज्वलित करने के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। पहाड़ियों और हरियाली से घिरा यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक सुंदरता का भी अनुभव कराता है।

रमई पाठ मंदिर की विशेषता केवल यहां स्थापित प्रतिमाओं तक सीमित नहीं है। माता सीता से जुड़ी लोकमान्यताएं, स्त्री रूप में हनुमान जी की प्रतिमा और प्राकृतिक जलधारा इस स्थान को विशिष्ट बनाती हैं। यही कारण है कि रमई पाठ मंदिर स्थानीय धार्मिक विरासत और जनआस्था के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में पहचाना जाता है।

Story By - विनोद जैन

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