बिलासपुर हाईकोर्ट (सोर्स-सोशल मीडिया)
बिलासपुर

'देह व्यापार अपराध नहीं', बिलासपुर हाईकोर्ट ने 3 महिलाओं के केस में सुनाया बड़ा फैसला

Bilaspur High Court Verdict: बिलासपुर हाईकोर्ट ने देह व्यापार से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि 'देह व्यापार अपराध नहीं है।

घनश्याम गंधर्व, चंदू निर्मलकर

Highlights

  • कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को किया खारिज।

  • जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने सुनाया फैसला।

  • स्वेच्छा से देह व्यापार करना अपने आप में अपराध नहीं है।

  • कोर्ट ने तीनों महिलाओं को किया बरी।

Chhattisgarh High Court Verdict in Prostitution Case: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने देह व्यापार से जुड़े एक मामले में तीन महिलाओं को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि केवल खुद देह व्यापार में शामिल होने के आधार पर किसी व्यक्ति को अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 4 के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

इस धारा के तहत अपराध साबित करने के लिए यह दिखाना जरूरी है कि आरोपी किसी दूसरे व्यक्ति के देह व्यापार से होने वाली कमाई पर जानबूझकर अपना जीवनयापन कर रहा था। जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि तीनों महिलाओं के खिलाफ ऐसा कोई आरोप साबित नहीं हुआ कि वे किसी दूसरी महिला की कमाई पर निर्भर थीं या उसके देह व्यापार से होने वाली आय से अपना जीवन चला रही थीं।

जानिए क्या है पूरा मामला?

मामला 11 जुलाई 2013 का है। पुलिस को सूचना मिली थी कि कोरबा के महाराणा प्रताप नगर स्थित एक मकान में देह व्यापार कराया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापा मारा और नौ आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। तीन महिलाओं के विरुद्ध अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 6 और 7 के तहत भी आरोप लगाए गए थे।

ट्रायल कोर्ट ने महिलाओं को धारा 6 और 7 के आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन धारा 4 के तहत दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को दो-दो साल के कठोर कारावास और 500-500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके बाद 28 अगस्त 2014 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट, कोरबा ने धारा 4 के आरोप से भी महिलाओं को बरी कर दिया। राज्य सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की सरकार की अपील?

हाईकोर्ट ने पाया कि महिलाओं के खिलाफ किसी अन्य महिला के देह व्यापार से होने वाली कमाई लेने या उसके लिए दलाल के रूप में काम करने का आरोप साबित नहीं हुआ। ऐसे में धारा 4 के तहत अपराध के जरूरी तत्व पूरे नहीं होते।

पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वेच्छा से देह व्यापार करना अपने आप में अपराध नहीं है। केवल इसी आधार पर महिलाओं को दंडित या प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने राज्य शासन की अपील खारिज कर तीनों महिलाओं को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा।

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