नगरनार स्थित एनएमडीसी स्टील प्लांट (सोर्स- सोशल मीडिया)
बस्तर

NMDC प्लांट में लगी आग, पुलिस-प्रशासन को भनक तक नहीं, प्रबंधन बोला- जिन्हें बताना था, बता दिया

Jagdalpur News: नगरनार स्थित एनएमडीसी स्टील प्लांट में रविवार सुबह ब्लास्ट फर्नेस के पास आग लगने की घटना ने अब एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। एसडीएम ने कहा कि उन्हें मीडिया से यह मिली जानकारी।

अजय श्रीवास्तव, चंदू निर्मलकर

Highlights

  • ब्लास्ट फर्नेस के पास आगजनी के बाद खुली सूचना तंत्र की पोल।

  • एसडीएम बोले- मीडिया से मिली जानकारी।

  • जिला शमन अधिकारी भी अनजान।

  • नगरनार का स्टील प्लांट को प्रबंधन ने बना रखा है, अभेद्य किला।

Nagarnar NMDC steel plant incident Update: एक तरफ प्लांट के भीतर आगजनी की घटना, दूसरी तरफ जिम्मेदार सरकारी एजेंसियों को खबर तक नहीं! नगरनार स्थित एनएमडीसी स्टील प्लांट में रविवार सुबह ब्लास्ट फर्नेस के पास आग लगने की घटना ने अब एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। आग लगी तो धुआं उठा, दमकल वाहन सक्रिय हुए, लेकिन स्थानीय पुलिस, एसडीएम और जिला शमन अधिकारी को इसकी आधिकारिक सूचना नहीं मिली। मामला सामने आया तो प्रबंधन का जवाब भी चौंकाने वाला था- “जिन्हें जानकारी देनी थी, उन्हें दे दी गई थी।”

अब सवाल है कि आखिर वे लोग कौन थे, जिन्हें जानकारी दी गई? अगर सूचना दे दी गई थी, तो फिर एसडीएम को मीडिया से खबर क्यों मिली? जिला शमन अधिकारी को घटना का पता क्यों नहीं चला? और स्थानीय पुलिस इस पूरे घटनाक्रम से अनजान क्यों रही?

औद्योगिक इकाई में आगजनी जैसी घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता। ऐसी स्थिति में दमकल, पुलिस-प्रशासन के बीच तत्काल समन्वय जरूरी होता है। लेकिन रविवार की घटना में सूचना को लेकर अलग-अलग तस्वीर सामने आई।

एसडीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि प्लांट प्रबंधन की ओर से आगजनी के संबंध में प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी गई। उन्हें घटना की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली। नगर सेनानी एवं जिला शमन अधिकारी संतोष मार्बल ने भी कहा कि उन्हें प्लांट में आग लगने की जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने बताया कि नियमानुसार आगजनी की घटना की सूचना संबंधित आपातकालीन एजेंसियों को दी जानी चाहिए।

यानी घटना प्लांट के भीतर हुई, लेकिन स्थानीय स्तर पर आपात व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं थी। ऐसे में सूचना देने की व्यवस्था और उसके पालन पर सवाल उठना लाजिमी है।

प्लांट के प्रबंधक एवं संचार प्रमुख रफीक अहमद का कहना है कि आगजनी की जानकारी जिन्हें देना जरूरी था, उन्हें दे दी गई थी। लेकिन इस जवाब में यह स्पष्ट नहीं हुआ कि सूचना किन अधिकारियों को दी गई, किस समय दी गई और किन एजेंसियों को इससे अवगत कराया गया।

दूसरी ओर, एसडीएम और जिला शमन अधिकारी सूचना नहीं मिलने की बात कह रहे हैं। दोनों पक्षों के बयानों के बीच अब सबसे अहम सवाल यही है कि सूचना का रास्ता कहां टूटा? क्या संबंधित एजेंसियों को सूचना देने की व्यवस्था का पालन हुआ था? इसका स्पष्ट जवाब सामने आना बाकी है।

नगरनार थाना प्रभारी विकेश कुमार तिवारी के अनुसार, स्टील प्लांट में सीआईएसएफ की तैनाती के बाद परिसर के भीतर होने वाली घटनाओं की जानकारी स्थानीय पुलिस तक नहीं पहुंचती और न ही इस संबंध में शिकायतें प्राप्त होती हैं।

यह स्थिति औद्योगिक परिसर और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। किसी बड़ी आपात स्थिति में पुलिस, दमकल और प्रशासन के बीच समय पर सूचना का आदान-प्रदान कितना प्रभावी है, इसकी समीक्षा जरूरी है।

एनएमडीसी प्लांट में सुरक्षा को लेकर सवाल पहले भी उठ चुके हैं। वर्ष 2024 में स्टील मेल्टिंग शॉप में आग लगने से छह लोग झुलस गए थे। अब ताजा घटना ने एक बार फिर सुरक्षा इंतजामों के साथ-साथ आपातकालीन सूचना तंत्र पर ध्यान खींचा है।

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