शेयर बाजार (फाइल फोटो) 
बिज़नेस

शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट, आईटी शेयरों की धुलाई से निवेशक परेशान

Share Market: लगातार तीसरे दिन भारी गिरावट दर्ज की गई। भू-राजनीतिक तनाव और आईटी सेक्टर में बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी 1% से ज्यादा फिसले। निवेशक सतर्क हैं और बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

प्रिया जैस

Indian Share Market Crash Today: भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का दिन बेहद निराशाजनक साबित हुआ। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर विदेशी संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे कारोबारी दिन भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। आज के सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में ही 1 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के पोर्टफोलियो को तगड़ा झटका लगा है।

बाजार का हाल और इंडेक्स की स्थिति

बाजार बंद होने के समय, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 999.79 अंकों यानी 1.29 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 76,664.21 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में भी दबाव साफ दिखा और यह 275.10 अंक यानी 1.14 प्रतिशत फिसलकर 23,897.95 के स्तर पर आकर रुका। दिन के कारोबार के दौरान बाजार में अस्थिरता का माहौल रहा। सेंसेक्स 77,483.80 पर खुला, लेकिन बिकवाली के दबाव में यह 1,260 अंक गिरकर 76,403.87 के निचले स्तर तक चला गया था। इसी तरह निफ्टी भी 24,100.55 पर खुलकर 23,813.65 के न्यूनतम स्तर तक लुढ़क गया।

आईटी सेक्टर में सबसे बड़ी गिरावट

आज के दिन की सबसे बड़ी मार IT सेक्टर पर पड़ी। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 5.29 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो बाजार की धारणा को खराब करने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार रही। इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसे दिग्गज शेयरों में 3.2 प्रतिशत से लेकर 6.9 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। इसके अलावा निफ्टी मीडिया, फार्मा, रियल्टी और हेल्थकेयर इंडेक्स भी लाल निशान में बंद हुए, जो बाजार के व्यापक स्तर पर बिकवाली का संकेत देते हैं।

भू-राजनीतिक तनाव बना बड़ी वजह

बाजार के जानकारों का मानना है कि मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बाजार की भावना को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और लेबनान-इजरायल सीजफायर पर स्पष्टता न होने से निवेशकों में घबराहट का माहौल है। इसके साथ ही, घरेलू स्तर पर विदेशी निवेशकों की निकासी और रुपये की कमजोरी ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है।

तकनीकी विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीकी नजरिए से निफ्टी 50 बेहद कमजोर स्थिति में है। निफ्टी का 24,000 के अहम स्तर से नीचे फिसलना एक नकारात्मक संकेत है। हालांकि अंत में थोड़ी रिकवरी हुई और यह 23,900 के आसपास बंद होने में सफल रहा, लेकिन यह अपने 20-दिवसीय ईएमए (EMA) से नीचे आ गया है, जो शॉर्ट टर्म में कमजोरी दर्शाता है। आरएसआई (RSI) का 50 के नीचे आना भी यह बताता है कि बाजार में तेजी की ताकत खत्म हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले सत्रों में 23,800 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट का काम करेगा। यदि निफ्टी इससे नीचे फिसलता है, तो गिरावट 23,600 तक बढ़ सकती है। वहीं, ऊपर की ओर 24,000 का स्तर अब एक मजबूत रेजिस्टेंस बन गया है, जिसके पार जाने के बाद ही बाजार में रिकवरी की उम्मीद की जा सकती है। फिलहाल, निवेशकों को सतर्क रहकर ट्रेड करने की सलाह दी जा रही है।

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