सोने का आभूषण(सांकेतिक तस्वीर) सोर्स- IANS
बिज़नेस

त्योहार से पहले भारत समेत कई देशों में सोने की मांग बढ़ी, कीमतों में आई तेजी, NDB रिपोर्ट में दावा

Gold Price In Middle East Tension: वैश्विक अनिश्चितता के बीच सोने की कीम में उतार-चढ़ाव को लेकर रिपोर्ट सामने आई है। केंद्रीय बैंक और एशियाई मांग में भारी बढ़ोतरी देखी गई है।

नितिन कुमार राय

Highlights:

  • सोने की कीमत को लेकर NDB वेल्थ मैनेजमेंट की रिपोर्ट आई सामने

  • 12-24 महीनों में 4,200-5,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस रहने की उम्मीद

  • रिपोर्ट में केंद्रीय बैंक और एशियाई मांग की वजह से मजबूती का दावा

NDB Wealth Management Report: मिडिल ईस्ट में तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच सोने की कीमत को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है। जिसके अनुसार अलग-अलग परिस्थिति के बावजूद सोने की कीमत में मजबूती आ रही है। NDB वेल्थ मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगले 12-24 महीनों में सोने की कीमतें 4,200-5,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और एशियाई निवेशकों की मजबूत मांग बाजार को आगे बढ़ा रही है, जिससे अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव का असर कम हो गया है।

अलग-अलग स्थिति में उतार-चढ़ाव

इस रिपोर्ट के लिखे जाने के समय, सोना 4,118.91 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जो 5.82 अमेरिकी डॉलर या 0.14 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद, सोना लगातार मजबूत हो रहा है। भले ही ऐसी स्थितियां मौजूद हैं जो आमतौर पर सोने की कीमतों पर दबाव डालती हैं, जैसे कि ऊंची अमेरिकी ब्याज दरें, लगातार बनी हुई महंगाई और मजबूत होता डॉलर।

सोने की कीमत को प्रभावित कर रहे कई फैक्टर

रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की चाल अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों पर निर्भर नहीं रह गई है। कीमतों को तय करने वाले कारकों में बदलाव आया है, क्योंकि केंद्रीय बैंक और एशियाई खरीदार ऊंची कीमतों पर भी सोना खरीदना जारी रखे हुए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्रीय बैंकों ने 2026 की दूसरी तिमाही में 289 टन ​​सोना खरीदा, जबकि एशियाई गोल्ड फंडों में साल की पहली छमाही के दौरान लगभग 70 टन सोने का शुद्ध निवेश आया। यह अब तक की पहली छमाही का सबसे मजबूत प्रदर्शन है।

अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की रणनीति

इसके विपरीत, इसी अवधि के दौरान उत्तरी अमेरिकी गोल्ड फंडों से लगभग 61 टन सोने की निकासी देखी गई। यह पश्चिमी देशों में निवेश की मांग पर अमेरिकी रियल यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर के मजबूत होने के असर को दर्शाता है। NDB वेल्थ का कहना है कि केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से अपने भंडार में विविधता लाने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोना खरीद रहे हैं, न कि कीमतों में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से मुनाफा कमाने के लिए। उन्हें उम्मीद है कि सरकारी क्षेत्र की ओर से सोने की खरीदारी मजबूत बनी रहेगी। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का अनुमान है कि 2026 में केंद्रीय बैंक लगभग 850 टन सोना खरीदेंगे, जो 2025 में दर्ज 863 टन के आंकड़े के करीब है।

सोने के कारोबार में हो सकता है परिवर्तन

सीमित आपूर्ति भी एक ऐसा कारक है जो कीमतों को सहारा दे रही है। वैश्विक स्तर पर खदानों से सोने का उत्पादन 2026 में केवल 2.4 प्रतिशत बढ़कर 3,907 टन रहने का अनुमान है। वहीं, खनन की बढ़ती लागत और लंबी विकास अवधि के कारण, उद्योग के लिए कीमतों में तेजी आने पर तुरंत प्रतिक्रिया देना मुश्किल हो जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, अगले 12-24 महीनों में सोने का कारोबार 4,200 USD से 5,000 USD प्रति औंस के बीच हो सकता है। खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति, महंगाई में कमी और अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी का रुकना कीमतों को नीचे ला सकता है।

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