Gen-Z Stock Market Investment Explained: पिछले कुछ दिनों से भारत में एक शब्द काफी सुर्खियों में रहा और वो है Gen-Z। इस युवा पीढ़ी ने दिल्ली के जंतर-मंतर से सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में उनकी भूमिका कितनी अहम है। अब उनकी भागीदारी हर सेक्टर में काफी तेजी से बढ़ती हुई नजर आ रही है। इस बात के सबूत शेयर बाजार के आंकड़ों में भी देखने को मिलने लगे हैं।
डेटा के मुताबिक, कोविड के बाद शेयर बाजार में जेन-जी की भागीदारी सबसे ज्यादा देखने को मिली है। वर्तमान समय में यही युवा पीढ़ी शेयर बाजार को अपने कंधे पर उठाए हुए हैं। आंकड़ों की माने तो मौजूदा समय मे शेयर बाजार में जेन-जी की भागीदारी लगभग 40 प्रतिशत हो चुकी है। जो कि दर्शाता है कि स्टॉक मार्केट में युवा वर्ग की संख्या 10.50 करोड़ से ज्यादा पहुंच गई है।
इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, देश की इंवेस्टर प्रोफाइल काफी तेजी से युवा और टेक-सैवी जेनरेशन की ओर जा रही है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स बताया जा रहा है कि मौजूदा समय में औसत भारतीय निवेशक मुश्किल से 30s की शुरुआत में है, और उनमें से लगभग आधे 30 से कम उम्र के हैं। हाल ही में एक बाजार विश्लेषण में सामने आया कि जेन-जी सेगमेंट एक बड़ी ताकत के तौर पर उभरा है, जो वित्त वर्ष 2020 में एनएसई रजिस्टर्ड निवेशकों के 25 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 तक 40 प्रतिशत हो गया।
जानकारों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 खत्म होने तक ये आंकड़ा करीब 45 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का आंकड़ा भी एक बड़े डेमोग्राफिक बदलाव के संकेत दे रहे हैं। सब-30 निवेशकों को हिस्सा मार्च 2019 में 22.6 प्रतिशत से बढ़कर जुलआई 2025 तक 38.9 प्रतिशत हो गया, जिससे औसत निवेशक की उम्र 38 से घटकर 33 हो गई है।
इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (IBEF) की रिपोर्ट के मुताबिक, युवा पीढ़ी पूरी तरह डिजिटल माध्यम से निवेश करती है। मोबाइल-फर्स्ट फिनटेक प्लेटफॉर्म ने निवेश को काफी आसान बना दिया है। मार्केट रेगुलेटर और फिनटेक स्टार्टअप्स बताते हैं कि यंग इनवेस्टर्स तेज, ऐप जैसे अनुभाव की मांग करते हैं। इंडस्ट्री के एक सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि 35 प्रतिशत नए निवेशक स्लो और जटिल प्रक्रियाओं की वजह से शुरुआती चरण जैसे की नो यो कस्टर( KYC) वेरिफिकेशन के दौरान ही पीछे हट जाते हैं। हालांकि, जो निवेशक बने रहते हैं, वे भी तेज और आसान प्रक्रिया की उम्मीद करते हैं।
भारत का नया निवेश सिर्फ कम उम्र का नहीं, बल्कि लंबे समय में फंड बनाने पर भी केंद्रीत है। रिपोर्ट के मुताबिक, अनुशासित निवेश के प्रति एक अहम बदलाव आया है।2025 में 35 साल से कम उम्र के भारतीयों ने सभी नए SIP अकाउंट्स में से 40 फीसदी खाते खोले। Gen Z के 19 फीसदी लोगों ने SIP के जरिए निवेश करने की बात कही (जबकि मिलेनियल्स में यह आंकड़ा 14 फीसदी था), और इनमें से लगभग 84 फीसदी ने इक्विटी म्यूचुअल फंड को चुना। अब सभी म्यूचुअल फंड फोलियो में से आधे 30 साल से कम उम्र के निवेशकों के पास हैं।
नई पीढ़ी इस बदलाव का नेतृत्व कर रहे हैं, जो जल्द मुनाफा के बजाय लंबे समय के लिए अपना पैसा बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं। उनके पोर्टफोलियों को देखने को बाद यह साफ दिखता है। Bain & Groww की रिपोर्ट में यह सामने आया कि सैलरीड यंग इंवेस्टर अपनी इनकम का 55-65 प्रतिशत हिस्सा म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं। शुरुआत भले ही साधारण एसआईफी करते हैं, लेकिन कई लोग बाद में बड़ी एकमुश्त (lumpsum) निवेश करने लगते हैं। पिछले दो सालों में, इक्विटी फंड में एकमुश्त निवेश का हिस्सा 11 फीसदी तक बढ़ा है, जो SIP निवेश के लगभग बराबर है।
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यह जेनरेशन रिस्क लेने के मामले में भी अधिक क्षमतावान है। आंकड़े बताते हैं कि Gen Z के निवेश का 58 प्रतिशत हिस्सा स्टॉक्स या इक्विटी फंड्स में जाता है, जो सोने या दूसरी एसेट्स में किए जाने वाले निवेश से अधिक है। ‘बिजनेस टुडे’ के एक सर्वे में पाया गया कि 45 फीसदी Gen Z सोने की स्थिरता के बजाय स्टॉक्स/SIPs को पसंद करते हैं, और 18-21 साल के युवाओं में से 72 फीसदी का कहना है कि उन्होंने इक्विटी में निवेश किया है। ऑनलाइन कंटेंट से प्रभावित होकर, कई Gen Z इन्वेस्टर्स तेजी से बढ़ने वाले फंड्स (high-growth funds) की ओर बढ़ रहे हैं। इन ग्रुप्स में स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड होल्डिंग्स सबसे तेजी से बढ़ रही हैं।