उपेन्द्र कुशवाहा व अमित शाह (डिजाइन फोटो) 
बिहार

चिराग से उलझे कुशवाहा...तो 'चाणक्य' ने संभाली कमान, इन दो वादों ने खत्म कर दिया सियासी ड्रामा

Bihar Politics: 14 अक्टूबर की रातभर चले सियासी ड्रामे के बाद आखिरकार भाजपा उपेन्द्र कुशवाहा को मनाने में कामयाब हो गई है। जिसके बाद एनडी में सीट बंटवारे के बाद फंसा पेच सुलझ गया है।

अभिषेक सिंह

Bihar Assembly Elections: रातभर चले ड्रामे के बाद आखिरकार भाजपा उपेन्द्र कुशवाहा को मनाने में कामयाब हो गई है। जिसके बाद एनडी में सीट बंटवारे के बाद फंसा पेच सुलझ गया है। अमित शाह ने कुशवाहा से मुलाकात करने के बाद मामले को रफा-दफा कर दिया है।

दरअसल, सूत्रों से पता चला है कि महुआ सीट अब चिराग पासवान को दे दी गई है। इस सीट को लेकर उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान के बीच विवाद चल रहा था। अब उपेंद्र कुशवाहा मान गए हैं। इसके अलावा, सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा के लिए फिर से चुना जाएगा और उन्हें विधान परिषद की एक सीट दी जाएगी। उनका राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है।

मुलाकात के बाद क्या बोले कुशवाहा?

उपेंद्र कुशवाहा ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने कहा, "मैंने अमित शाह जी से इस बारे में चर्चा की। मुझे उम्मीद है कि अब कोई मुश्किल नहीं आएगी। बिहार में एनडीए की सरकार ज़रूर बनेगी।" महुआ सीट के बारे में उन्होंने कहा कि इस बारे में बाद में संसदीय सत्र में घोषणा की जाएगी, लेकिन इस पर चर्चा हुई।

कुशवाहा की पार्टी को मिली 6 सीटें

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए के सीट बंटवारे के तहत उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) ने छह सीटें जीती हैं। राज्य में चुनाव दो चरणों में होंगे। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर और दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा, जिसके नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।

उपेन्द्र कुशवाहा का सियासी सफर

उपेंद्र कुशवाहा 2000 से 2005 तक बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। उन्होंने 2002-2004 तक बिहार विधानसभा में समता पार्टी के उपनेता के रूप में कार्य किया। वे मार्च 2004 से फरवरी 2005 तक बिहार विधानसभा में समता पार्टी के नेता रहे और विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्यरत रहे। वे 2010 से 2013 तक राज्यसभा के सदस्य भी रहे। अगस्त 2010 से जनवरी 2013 तक वे कृषि संबंधी स्थायी समिति के सदस्य भी रहे।

मई 2014 में 16वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। 27 मई 2014 से 9 नवंबर 2014 तक वे केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे। उन्होंने 9 नवंबर, 2014 से मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया। 1985 से, वे समता महाविद्यालय, जंदाहा (वैशाली), जिसे अब मुनेश्वर सिंह मुनेश्वरी समता महाविद्यालय के नाम से जाना जाता है, में राजनीति विज्ञान विभाग में व्याख्याता रहे हैं।

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