File Pic 
आर्टिकल

चित्रकूट गधा मेला: यहाँ 'शाहरुख' 10 तो 'सलमान' बिकते हैं 7 लाख रुपये में, इन फिल्मी एक्टर्स के नाम से भी मची धूम

राहुल गोस्वामी

नयी दिल्ली/चित्रकूट. एक बड़ी ही रोचक खबर के अनुसार उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के चित्रकूट (Chitrakoot) में मुग़ल काल से लग रहे ऐतिहासिक अन्तर्राज्जीय गधा मेले (Donkey Fair) में इस बार फिल्मी सितारों के नाम वाले गधे और खच्चर भी खूब महंगे दाम पर बिके हैं। इनमे ‘शाहरुख़ खान’ और ‘सलमान खान’ की कीमत तो लाखों में रही। वहीं सबसे महंगा गधा 10 लाख रूपए में बिका जिसका नाम ‘शाहरुख’ था। वहीं सलमान की सात लाख में बिक्री हुई। लेकिन जनाब रुकिए, यहाँ फिल्मी अभिनेत्रियों के नाम वाले भी पांच से पचास हजार में बिके हैं। इसके अलावा ऋतिक, रणवीर, अक्षय और सैफ नाम के गधों की कीमत भी यहाँ अच्छी ख़ासी और बढ़चढ़कर लगाई गई।

दरअसल नयागांव में लगे दो दिवसीय गधा मेले में इस बार छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के अलावा बिहार, महाराष्ट्र और नेपाल से भी अनेकों व्यापारी अपने गधे और खच्चरों को लेकर पहुंचे हुए हैं। वहीं आयोजकों का अनुमान है कि इस बार यहाँ पांच करोड़ से अधिक का व्यापार होगा। पता हो कि चित्रकूट में लगने वाला गधा मेला काफी प्रसिद्द है। यहाँ हर साल दिवाली के बाद इसका आयोजन होता है, जिसमें पड़ोसी राज्यों के व्यापारी अपने गधों व खच्चरों के साथ यहाँ व्यवसाय हेतु पहुंचते हैं।

औरंगजेब ने की थी इसकी शुरुआत

गौरतलब है कि इस मेले का आयोजन दरअसल मुग़ल काल में शुरू हुआ था। जी हाँ, मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसकी शुरुआत कराई थी। तब से लेकर आज तक इस मेले का आयोजन बदस्तूर होता चला आ रहा है। औरंगजेब के सैन्य बल ने घोड़ों की कमी के चलते यहाँ गधा मेला लगवाया गया था, जिसमें अफगानिस्तान से भी अनेकों अच्छी नस्ल के खच्चर लाए गए थे। तब से इस गधा मेले की यह परंपरा चली आ रही है। हमेशा की तरह इस बार भी फिल्मी सितारों के नाम वाले गधों की डिमांड ज्यादा है।

खरीददारों के अलावा मेला घूमने आए लोगों के मध्य भी ये गधे आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इस मुगलिया समय से आ रहे मेले में गधों की खूब बढ़ा-चढ़ाकर बोली लगाई जाती है। जो सबसे ऊंची बोली यहाँ लगाता है, गधा उसका हो जाता है, फिर चाहे उसका नाम 'शाहरुख़' या 'सलमान' ही क्यों न हों।

आर्टिकल 370 से नक्सलवाद के खिलाफ अभियान तक, अमित शाह के 5 सबसे बड़े फैसले, जिसने बदली देश की तस्वीर

Amit Shah: 1982 की वह पहली मुलाकात, जिसने बदल दी भारतीय राजनीति की दिशा; जानिए मोदी-शाह की दोस्ती का राज

अब नहीं जाएंगे जंतर-मंतर...रिहाई के लिए सौरव दास और आशुतोष रांका ने क्या-क्या वादे किए?

अजेय रणनीतिकार: चुनावी रिकॉर्ड से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक, कैसे काम करती है अमित शाह की रणनीति?

Amit Shah Nickname: बचपन में अमित शाह को किस नाम से बुलाते थे? पढ़ें दिलचस्प किस्सा