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चारदीवारी में बीत रहा बचपना; बच्चों का तनाव दूर करने बोर्ड ने दिया सुझाव

नवभारत डेस्क

नागपुर. कोरोना काल में जहां बच्चों का बचपना चारदीवारी में कैद हो चुका है तो वहीं वे स्कूल की पढ़ाई और खेल से भी दूर हो जाते हो रहे हैं. लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण की वजह से बच्चों के अंदर तनाव और डर पैदा हो गया है. इसे लेकर सीबीएसई भी चिंतित हैं. बोर्ड ने ऐसे बच्चों को तनाव से दूर रहने के लिए पैरेंट्स को बच्चों को ज्यादा से ज्यादा समय देने के लिए सलाह दी है. इसके लिए उसने बुकलेट ‘मेंटल हेल्थ एंड वेल्बीइंग, अ पर्सपेक्टिव’ भी जारी की है. इसे पैरेंट्स सीबीएसई की वेबसाइट पर देख सकते हैं. इस 47 पेज की बुकलेट को 10 चैप्टर में विभाजित किया गया है जिसमें बच्चों की मानसिक स्थिति और उसकी वजह के बारे में जानकारी दी है. इससे बच्चों को तनाव से बाहर लाने के लिए पैरेंट्स को काफी मदद मिलेगी. बच्चों के साथ जितना हो सके बच्चे बनकर रहें, उनके साथ खेलें और उनकी इच्छाओं के अनुसार उनके खान-पान का भी ख्याल रखें ताकि बच्चे मोटिवेट हो सकें.

बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है तीसरी लहर

शिक्षा के जानकारों का कहना है कि जैसी कि शंका जताई जा रही है कि कोरोना की तीसरी लहर भी आएगी. कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. ऐसे में हर पैरेंट्स को चाहिए कि वे अपने बच्चों को लगातार मोटिवेट करें और उनकी सेहत का पूरा ख्याल रखें. इस वक्त बच्चों को सबसे ज्यादा उनके पैरेंट्स के प्यार और समय की जरूरत है. ऐसे में सीबीएसई ने भी पैरेंट्स की मदद के लिए बुकलेट जारी किया है ताकि पैरेंट्स को बच्चों को समझने में आसानी हो सके. 

कहीं मोबाइल की लत न लग जाए

नागपुर जिले के कुछ पैरेंट्स से बात हुई. उनका कहना है कि लॉकडाउन की वजह से स्कूल-कॉलेज बंद हैं. अब उनके पास पढ़ाई के लिए केवल मोबाइल ही एकमात्र रास्ता है. लेकिन कुछ समय क्लास अटेंड करने के बाद बच्चे मोबाइल में गेम और सोशल मीडिया में एक्टिव हो जाते हैं जिससे पैरेंट्स की चिंता और बढ़ने लगी है. कई पैरेंट्स का कहना है कि बच्चों को इस लॉकडाउन में मोबाइल से दूर रखने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है. लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई के कारण मोबाइल देना मजबूरी है. आने वाले समय में कहीं बच्चों को मोबाइल की लत न लग जाए. 

12वीं के छात्रों की चिंता बरकरार

10वीं क्लास के स्टूडेंट्स की परीक्षाएं रद्द होने पर उनका मानसिक तनाव भले ही कुछ कम हुआ हो लेकिन 12वीं क्लास के स्टूडेंट्स पर अब भी एग्जाम की चिंता बनी हुई है. उनकी चिंता अब भी बरकरार है. ऐसे में बुकलेट के पहले चैप्टर में मानसिक स्वास्थ्य की अहमियत के बारे में बताया गया है. साथ ही बच्चों में तनाव कम करने के लिए पैरेंट्स और टीचर्स को सुझाव भी दिए गए हैं.

इस तरह के सुझाव आएंगे काम

-पैरेंट्स परिवार के सदस्यों को समय दें. इससे वो घर में हताश और बोर नहीं होंगे. 

- बच्चों के सामने किसी भी तरह की निगेटिव बातें न करें.

- किसी की बुराई करने से बेहतर किसी की तारीफ करें. किसी की बुराई सुनने से मानसिक तनाव बढ़ता है.

- सीनियर छात्रों के लिए करिअर गाइडेंस वर्कशॉप आयोजित करें. हर स्ट्रीम के बारे में बताएं.

- टीचर्स को साइबर बुलिंग पर भी उनके साथ बात करनी चाहिए जिससे वे बच सकें.

टेली काउंसलिंग भी हुई शुरू

सीबीएसई ने 24 मई से 10वीं-12वीं के कैंडिडेट्स और उनके पेरेंट्स के लिए टेली काउंसलिंग शुरू कर दी है. काउंसलिंग की यह सुविधा सोमवार से शुक्रवार सुबह 9.30 से शाम 5.30 बजे तक उपलब्ध रहेगी. बोर्ड हर रोज दिन में 3 बैचों में टोल फ्री नंबर- 1800 11 8004 पर टेली काउंसलिंग करेगा. देशभर से 24 प्रिंसिपल और सलाहकार स्टूडेंट्स की मदद करेंगे. 

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