1 जुलाई को क्यों मनाया जाता है National Doctor’s Day, यहां जानें!

'नेशनल डॉक्टर्स डे' मनाने की शुरुआत सबसे पहले अमेरिका में 30 मार्च 1933 को डॉ. चार्ल्स बी. एलमंड की पत्नी यूडोरा ब्राउन एलमंड ने की थी।

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यूडोरा ब्राउन एलमंड ने अपने पति के पेशे की कठिनाइयों, समझौतों और बलिदानों को देखा और इस दिन को मनाना शुरू कर दिया। 30 मार्च, 1958 को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने डॉक्टर दिवस के प्रस्ताव को अपनाया।

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भारत में नेशनल डॉक्टर डे मनाने की शुरुआत 1 जुलाई, 1991 से हुई। 1 जुलाई, 1882 को जन्मे महान चिकित्सक और बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय के सम्मान में यह दिन मनाया जाता था।

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डॉ. रॉय को देश के सर्वोच्च भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था। उनके सम्मान में उनके जन्मदिन पर पूरे देश में डॉक्टर्स डे मनाया जाता है।

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डॉ. बिधान चंद्र रॉय न सिर्फ एक डॉक्टर बल्कि एक टीचर, फ्रीडम फाइटर और सोशल एक्टिविस्ट भी रहे। उन्होंने अपना पूरा जीवन जरूरतमंदों की सेवा में समर्पित कर दिया था।

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भारत में हर साल राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस एक अलग और अनोखी थीम पर मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम 'सेलिब्रेटिंग रेजिलिएंस एंड हीलिंग हैंड्स' है।

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पेंडेमिक (महामारी) के दौरान बिना थके, बिना रुके और बिना अपनी परवाह किए दिन-रात दूसरों की सेवा में लगे डॉक्टरों के सम्मान में यह थीम रखी गई है।

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हर किसी के जीवन में डॉक्टर अलग-अलग भूमिका निभाते हैं। किसी के लिए वह दर्द निवारक है तो किसी की जिंदगी में वह किसी फरिश्ते से कम नहीं है जो किसी को बीमारी से ठीक कर उसकी जान बचाता है।

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आम लोगों द्वारा डॉक्टरों के इसी त्याग, परिश्रम और समर्पण को याद करने के लिए हर साल राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस (National Doctor’s Day) मनाया जाता है।

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