क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड, जिस पर मचा है हंगामा!
Uniform Civil Code (समान नागरिक संहिता) एक बार फिर चर्चा में आ गई है। विधि आयोग ने इस पर परामर्श प्रक्रिया शुरू कर दी है, इसके तहत धार्मिक और सामाजिक संगठनों से उनकी राय मांगी गई है, जो 30 दिन के भीतर देनी होगी।
Photo: Social Media
Uniform Civil Code एक देश एक नियम के तहत काम करता है। इसके तहत सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान कानून के तहत विवाह, तलाक, गोद लेने, विरासत और उत्तराधिकार जैसे कानूनों को नियंत्रित करने की बात कही गई है।
Photo: Social Media
यदि नागरिक संहिता लागू हो गई तो विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बंटवारे जैसे सभी विषयों में नागरिकों के लिए एक कानून होगा।
Photo: Social Media
भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में नागरिक संहिता का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।
Photo: Social Media
यह संहिता इस आधार पर निर्भर होता है कि आधुनिक सभ्यता में धर्म और कानून के बीच कोई संबंध नहीं है।
Photo: Social Media
संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर ने कहा था कि समान नागरिक संहिता वांछनीय है, लेकिन फिलहाल यह स्वैच्छिक होना चाहिए।
Photo: Social Media
भारत विविधताओं का देश का कहा जाता है। यहां अलग-अलग जाति और धर्मों में शादी और तलाक को लेकर अलग-अलग नियम हैं। वहीं, लोग शादी और तलाक को लेकर पर्सनल लॉ बोर्ड ही जाते हैं।
Photo: Social Media
इन नियमों के कारण कानूनी व्यवस्था भी प्रभावित होती है। यूनिफॉर्म सिविल कोड बनने के बाद ऐसी सभी चीजें एक ही कानून के दायरे में आ जाएंगी।
Photo: Social Media
यूनिफॉर्म सिविल कोड के विरोध का कारण यह है कि इस नियम के लागू होने से कई विशेष धर्मों को मिले विशेषाधिकार खत्म हो जायेंगे और उन्हें सारे काम भारतीय कानून के तहत ही करने होंगे।