किस कारण से आंखों का रंग होता है अलग?
किस कारण से आंखों का रंग होता है अलग?

आंखों का रंग क्यों होता है अलग

आंखों का रंग एक जटिल जैविक प्रक्रिया का परिणाम है, जो जेनेटिक्स, मेलानिन और पर्यावरणीय कारकों के संयुक्त प्रभाव से तय होता है।
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मेलानिन की मात्रा पर निर्भर

आंखों का रंग मेलानिन नामक पिगमेंट की मात्रा पर निर्भर करता है जितना ज़्यादा मेलानिन, उतना गहरा रंग, और जितना कम मेलानिन, उतना हल्का रंग।
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आंखों का रंग मेलानिन नामक पिगमेंट की मात्रा पर निर्भर करता है जितना ज़्यादा मेलानिन, उतना गहरा रंग, और जितना कम मेलानिन, उतना हल्का रंग।

जेनेटिक कारण

आंखों का रंग माता-पिता के जीन से तय होता है। यानी आपके आई कलर पर आपके परिवार की जेनेटिक बनावट का बड़ा असर होता है।

आंखों का रंग माता-पिता के जीन से तय होता है। यानी आपके आई कलर पर आपके परिवार की जेनेटिक बनावट का बड़ा असर होता है।

रोशनी का प्रभाव

आंखों का रंग अलग-अलग रोशनी में हल्का या गहरा दिखाई दे सकता है, क्योंकि लाइट आईरिस में मौजूद पिगमेंट्स से टकराकर रिफ्लेक्ट होती है।

आंखों का रंग अलग-अलग रोशनी में हल्का या गहरा दिखाई दे सकता है, क्योंकि लाइट आईरिस में मौजूद पिगमेंट्स से टकराकर रिफ्लेक्ट होती है।

बचपन में रंग बदलना

कई बच्चों की आंखें जन्म के समय नीली या ग्रे होती हैं, लेकिन कुछ महीनों या सालों में मेलानिन बढ़ने पर उनका रंग गहरा होकर भूरा या हेज़ल हो जाता है।

कई बच्चों की आंखें जन्म के समय नीली या ग्रे होती हैं, लेकिन कुछ महीनों या सालों में मेलानिन बढ़ने पर उनका रंग गहरा होकर भूरा या हेज़ल हो जाता है।

हॉर्मोनल या हेल्थ कारण

उम्र, हार्मोनल बदलाव या कुछ मेडिकल कंडीशंस भी आंखों के रंग में हल्का बदलाव ला सकते हैं।

उम्र, हार्मोनल बदलाव या कुछ मेडिकल कंडीशंस भी आंखों के रंग में हल्का बदलाव ला सकते हैं।

भौगोलिक अंतर

गर्म देशों के लोगों में सूरज की तेज़ रोशनी से बचाव के लिए आंखों में मेलानिन ज़्यादा होता है, इसलिए आंखें आमतौर पर भूरी होती हैं। ठंडे इलाकों में मेलानिन कम होने से आंखें हल्की रंग की होती हैं।

गर्म देशों के लोगों में सूरज की तेज़ रोशनी से बचाव के लिए आंखों में मेलानिन ज़्यादा होता है, इ

सलिए आंखें आमतौर पर भूरी होती हैं। ठंडे इलाकों में मेलानिन कम होने से आंखें हल्की रंग की होती हैं।

आईरिस की संरचना

आंख के बीच के हिस्से ‘आईरिस’ की बनावट, उसमें मौजूद कोलाजेन फाइबर और पिगमेंट्स की गहराई भी रंग को प्रभावित करते हैं।

आंख के बीच के हिस्से ‘आईरिस’ की बनावट, उसमें मौजूद कोलाजेन फाइबर और पिगमेंट्स की गहराई भी रंग को प्रभावित करते हैं।

नीली आंखों का कारण

नीली आंखों में वास्तव में नीला पिगमेंट नहीं होता यह लाइट के स्कैटर होने की वजह से नीली दिखती हैं, ठीक वैसे जैसे आसमान नीला लगता है।

नीली आंखों में वास्तव में नीला पिगमेंट नहीं होता यह लाइट के स्कैटर होने की वजह से नीली दिखती हैं, ठीक वैसे जैसे आसमान नीला लगता है।

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