सावन माह में करें ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन, दूर होंगी सारी परेशानियां!
ओंकारेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, इसलिए इस ज्योतिर्लिंग का बहुत विशेष महत्व है।
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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग एक प्राकृतिक शिवलिंग है। कहा जाता है कि यहां 33 करोड़ देवी-देवता निवास करते हैं। 12 ज्योतिर्लिंगों में ओंकारेश्वर का पवित्र ज्योतिर्लिंग भी शामिल है।
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शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि ओंकारेश्वर के दर्शन करने गए श्रद्धालु जब तक यहां नर्मदा सहित अन्य नदियों का जल शिवलिंग पर नहीं चढ़ाते, उनकी यात्रा पूरी नहीं मानी जाती है।
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हिंदू धर्म में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को लेकर कई मान्यताएं हैं। जिसमें सबसे बड़ी मान्यता यह है कि भगवान भोलेनाथ तीनों लोकों का भ्रमण कर प्रतिदिन रात्रि में शयन के लिए इसी मंदिर में आते हैं।
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यह भी मान्यता है कि इस मंदिर में महादेव माता पार्वती के साथ चौसर खेलते हैं। यही कारण है कि आज भी रात के समय यहां चौसर फैला रहता है।
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जिस मंदिर में रात के समय परिंदा भी पर नहीं मार पाता, सुबह होते ही चौसर और उसके पासे की कुछ चीजें इस तरह बिखरी हुई मिलती हैं मानो रात में किसी ने इसे खेला हो।
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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से लगभग 80 किमी की दूरी पर नर्मदा नदी के तट पर स्थित है। यह एकमात्र मंदिर है जो नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित है।