By: Simran Singh
NavBharat Live Desk
आजकल कई युवा अपनी कार को यूनिक और आकर्षक बनाने के लिए अलग-अलग मॉडिफिकेशन करवाते हैं। लेकिन हर बदलाव कानूनी नहीं होता।
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तेज आवाज वाली एग्जॉस्ट सिस्टम कार को स्पोर्टी लुक देती है। लेकिन तय सीमा से ज्यादा शोर या प्रदूषण फैलाने वाला एग्जॉस्ट गैरकानूनी माना जाता है। नतीजा: भारी जुर्माना और कार्रवाई।
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प्राइवेसी और धूप से बचने के लिए कई लोग शीशों पर डार्क फिल्म लगवा लेते हैं। लेकिन भारत में विंडो ट्रांसपेरेंसी को लेकर सख्त नियम हैं। नतीजा: चालान और फिल्म हटाने का आदेश।
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अलग दिखने के लिए कई लोग फैंसी फॉन्ट और डिजाइन वाली नंबर प्लेट लगाते हैं। लेकिन सरकार द्वारा तय फॉर्मेट से अलग नंबर प्लेट अवैध है। नतीजा: पुलिस तुरंत चालान कर सकती है।
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कार में लाल, नीली या फ्लैशिंग LED लाइट्स लगाना नियमों के खिलाफ हो सकता है। ये दूसरी गाड़ियों के ड्राइवरों का ध्यान भटका सकती हैं। नतीजा: जुर्माना और लाइट्स हटाने का आदेश।
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कुछ लोग कार को ऊंचा दिखाने के लिए बड़े टायर और मॉडिफाइड सस्पेंशन लगवाते हैं। यह गाड़ी के बैलेंस और सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
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कई कार मालिक बाद में सनरूफ लगवाते हैं। लेकिन कंपनी द्वारा डिजाइन की गई संरचना में बदलाव सुरक्षा मानकों को प्रभावित कर सकता है। नतीजा: कानूनी परेशानी और बीमा विवाद।
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बिना अनुमति किए गए मॉडिफिकेशन के कारण दुर्घटना होने पर बीमा कंपनी क्लेम रिजेक्ट कर सकती है। यानी नुकसान की भरपाई आपकी जेब से करनी पड़ सकती है।
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केवल वही बदलाव करवाएं जो मोटर वाहन नियमों के अनुरूप हों। स्टाइल जरूरी है, लेकिन सुरक्षा और कानून उससे भी ज्यादा जरूरी हैं।
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