sita (3)

दशरथ की मृत्यु

माता सीता का ऐसा श्राप, जिसे आज भी भुगत रहे ये लोग, इस कथा से आपको 3 नाम के बारें में पता चलेगा जिसको माता सीता ने श्राप दिया है।
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आत्मा

Dasharatha

ऐसे में श्री राम और लक्ष्मण सामग्री इकट्ठा करने चल दिए। तभी राजा दशरथ की आत्मा ने सीता जी से कहा कि पिंडदान का समय निकल रहा है।

सीता ने किया पिंडदान

Sita

क्योकि भगवान राम नहीं थे, इसलिए माता सीता ने अपने ससुर का पिंडदान करने का निर्णय लिया।

फाल्गु नदी

Falgu River

माता सीता ने फाल्गु नदी के किनारे ससुर राजा दशरथ का पिंडदान किया। उन्होंने फाल्गु नदी, गाय, वटवृक्ष और केतकी के फूल को साक्षी बनाया था।

श्री राम को बताई घटना

Ram sita

इसके बाद दशरथ की आत्मा को शांति मिली बाद में श्री राम और लक्ष्मण जी को सीता ने उन्हें पूरी घटना सुनाई।

गवाह

sita (1)

प्रभु राम और लक्ष्मण को सुनकर आश्चर्य हुआ तो सीता जी ने चारों साक्षियों को गवाही बनाया तीन ने झूठ बोल दिया कि उन्हें कुछ नहीं पता।

बोला झूठ

sita (2)

फाल्गु नदी, गाय और केतकी के फूल ने झूठ बोल की उन्हें कुछ नहीं पता।

दिया श्राप

sita (3)

क्रोधित होकर सीता ने उन्हें श्राप दिया। उन्होंने फाल्गु नदी को श्राप दिया उसका जल सूख जाएगा।

गाय का श्राप

Cow

गाय को श्राप दिया पूजनीय होकर भी भोजन के लिए दर-दर भटकेगी।

केतकी के फूल का श्राप

Ketaki flower

केतकी के फूल को श्राप दिया पूजा में इस फूल का इस्तेमाल नहीं होगा।

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