By: Preeti Sharma
NavBharat Live Desk
महिलाओं के सोलह श्रृंगार में पायल एक खास जगह रखती है जिसे परंपरा से भी जोड़ा जाता है।
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आयुर्वेद के अनुसार चांदी चंद्रमा से जुड़ी है जो शरीर को शीतलता प्रदान करती है।
पैरों में पायल के रगड़ने से स्किन के जरिए धातुओं के तत्व शरीर में जाते हैं जिससे हड्डियां मजबूत होती है।
हमारे पैरों में निकलने वाली ऊर्जा को शरीर में वापस भेजने के लिए पायल महत्वपूर्ण काम करती है।
माना जाता है कि पायल पहनने से महिलाओं को पीरियड्स में होने वाले दर्द से राहत मिलती है।
वास्तु के अनुसार पायल की आवाज घर में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में मदद करती है।
भारतीय संस्कृति में पायल सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक है जो प्राचीन समय से पहनी जा रही है।
कहा जाता है कि प्राचीन काल में पायल परिवार की मर्यादा और बहू के आने की सूचना का माध्यम थी।