By: Simran Singh
NavBharat Live Desk
ज्यादातर ऑप्टिकल माउस के नीचे लाल LED दिखाई देती है। लेकिन इसके पीछे सिर्फ डिजाइन नहीं, बल्कि विज्ञान और टेक्नोलॉजी का बड़ा कारण है।
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शुरुआती माउस में नीचे कोई लाइट नहीं होती थी। उसके अंदर रबर या मेटल की एक गेंद होती थी, जो घूमकर कर्सर को कंट्रोल करती थी।
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बॉल वाले माउस को सही तरीके से चलाने के लिए माउस पैड जरूरी था। धूल जमा होने पर कर्सर भी अटकने लगता था।
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1990 के दशक में ऑप्टिकल माउस आए। इनमें बॉल की जगह लाल LED और सेंसर लगाए गए, जिससे कर्सर ज्यादा स्मूथ चलने लगा।
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लाल LED सतह पर रोशनी डालती है। नीचे लगा सेंसर हर सेकंड हजारों तस्वीरें लेकर माउस की मूवमेंट को पहचानता है।
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सबसे सस्ती LED टेक्नोलॉजी सेंसर के लिए सबसे आसान सतह की बनावट साफ दिखती है
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लाल LED, हरी या नीली LED की तुलना में कम बिजली खर्च करती है। इसलिए वायरलेस माउस की बैटरी भी ज्यादा चलती है।
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आज कई प्रीमियम माउस में Infrared LED या Laser Sensor मिलता है। इनकी रोशनी आंखों से दिखाई नहीं देती, लेकिन सटीकता शानदार होती है।
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Mouse के नीचे दिखने वाली लाल लाइट सिर्फ रोशनी नहीं, बल्कि तेज, सटीक और स्मूथ कर्सर मूवमेंट का राज है।
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