By: Simran Singh
NavBharat Live Desk
प्लग में पिन की संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि डिवाइस कितनी बिजली खपत करता है और उसे कितनी सुरक्षा की जरूरत है।
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मोबाइल चार्जर, इलेक्ट्रिक लैंप, LED लाइट और सजावटी झालर जैसे कम बिजली खपत वाले उपकरणों में 2-पिन प्लग इस्तेमाल होता है। नतीजा: भारी जुर्माना और कार्रवाई।
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इनमें दो गोल पिन होती हैं, जिनका व्यास करीब 4 मिमी होता है। इसे दुनियाभर में Euro Plug डिजाइन के नाम से भी जाना जाता है।
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आजादी के बाद गांवों और दूरदराज के इलाकों तक बिजली पहुंचाने के दौरान कम लागत और आसान इंस्टॉलेशन की वजह से कई जगह 2-पिन सिस्टम अपनाया गया।
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फ्रिज, AC, वॉशिंग मशीन, गीजर और अन्य हाई-पावर उपकरणों में 3-पिन प्लग दिया जाता है।
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तीसरी और सबसे लंबी पिन को अर्थ (Earth) पिन कहते हैं। यह अतिरिक्त करंट को जमीन में भेजकर सुरक्षा प्रदान करती है।
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बिजली का झटका लगने का खतरा कम होता है। शॉर्ट सर्किट और आग लगने की संभावना घटती है। महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सुरक्षित रहते हैं।
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भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार, 5 एम्पियर से अधिक बिजली खपत करने वाले उपकरणों में 3-पिन प्लग अनिवार्य माना जाता है।
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नहीं। 2-पिन प्लग कम बिजली खपत वाले उपकरणों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन हाई-पावर डिवाइस में हमेशा 3-पिन प्लग का ही इस्तेमाल करें, ताकि शॉर्ट सर्किट और बिजली के झटके का खतरा कम रहे।
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