2-पिन vs 3-पिन प्लग में क्या है अंतर?

 07 July 2026

By: Simran Singh

NavBharat Live Desk

प्लग में पिन की संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि डिवाइस कितनी बिजली खपत करता है और उसे कितनी सुरक्षा की जरूरत है।

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क्या है दोनों में फर्क?

मोबाइल चार्जर, इलेक्ट्रिक लैंप, LED लाइट और सजावटी झालर जैसे कम बिजली खपत वाले उपकरणों में 2-पिन प्लग इस्तेमाल होता है। नतीजा: भारी जुर्माना और कार्रवाई।

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2-पिन प्लग किन डिवाइस में?

इनमें दो गोल पिन होती हैं, जिनका व्यास करीब 4 मिमी होता है। इसे दुनियाभर में Euro Plug डिजाइन के नाम से भी जाना जाता है।

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2-पिन प्लग की खासियत

आजादी के बाद गांवों और दूरदराज के इलाकों तक बिजली पहुंचाने के दौरान कम लागत और आसान इंस्टॉलेशन की वजह से कई जगह 2-पिन सिस्टम अपनाया गया।

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भारत में कैसे शुरू हुआ 2-पिन सिस्टम?

फ्रिज, AC, वॉशिंग मशीन, गीजर और अन्य हाई-पावर उपकरणों में 3-पिन प्लग दिया जाता है।

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3-पिन प्लग किन उपकरणों के लिए?

तीसरी और सबसे लंबी पिन को अर्थ (Earth) पिन कहते हैं। यह अतिरिक्त करंट को जमीन में भेजकर सुरक्षा प्रदान करती है।

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तीसरी पिन क्यों होती है?

बिजली का झटका लगने का खतरा कम होता है। शॉर्ट सर्किट और आग लगने की संभावना घटती है। महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सुरक्षित रहते हैं।

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Earth Pin के फायदे

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार, 5 एम्पियर से अधिक बिजली खपत करने वाले उपकरणों में 3-पिन प्लग अनिवार्य माना जाता है।

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BIS के नियम क्या कहते हैं?

नहीं। 2-पिन प्लग कम बिजली खपत वाले उपकरणों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन हाई-पावर डिवाइस में हमेशा 3-पिन प्लग का ही इस्तेमाल करें, ताकि शॉर्ट सर्किट और बिजली के झटके का खतरा कम रहे।

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क्या 2-पिन प्लग असुरक्षित है?

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