By: Preeti Sharma
NavBharat Live Desk
अरब सागर के तट पर स्थित यह मंदिर अपनी भव्यता और अटूट आस्था के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
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यहां शिव और शक्ति (मल्लिकार्जुन और देवी भ्रमरांबा) दोनों एक साथ साक्षात विराजते हैं।
मान्यता है कि महादेव यहाँ विश्राम के लिए आते हैं और भक्त इसे मोक्ष का द्वार मानते हैं।
पंचकेदार में से एक जहां पांडवों को शिव ने बैल के रूप में दर्शन दिए थे।
डाकिनी के जंगलों में स्थित इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन से बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं।
कहते हैं कि काशी शिव के त्रिशूल पर टिकी है और यहाँ मृत्यु भी मंगलकारी होती है।
नासिक में गोदावरी के तट पर स्थित इस लिंग में तीन छोटे लिंग विराजमान हैं।
देवघर में स्थित इस मंदिर का संबंध रावण की तपस्या और शिव की शक्ति से है।
द्वारका के पास स्थित यह ज्योतिर्लिंग शत्रुओं पर विजय और रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
चार धामों में से एक जहां दर्शन करने से रावण वध जैसे दोष भी दूर हो जाते हैं।
औरंगाबाद के पास स्थित इस मंदिर का निर्माण शिव भक्त घुश्मा की भक्ति के लिए हुआ था।