एकलौता महाग्रंथ 'गीता' जिसकी मनाई जाती है जयंती, जानें क्या है इसका महत्व?

महाग्रंथ श्रीमद्भागवत गीता हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखती है।

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दुनिया के किसी भी धर्म या संप्रदाय के किसी भी ग्रंथ की जयंती नहीं मनाई जाती लेकिन गीता विशेष है, केवल श्रीमद्भागवत गीता की जयंती मनाई जाती है।

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ऐसा माना जाता है कि अन्य ग्रंथ मनुष्यों द्वारा लिखे या संकलित किए गए हैं, जबकि गीता का जन्म स्वयं श्री भगवान के मुख से हुआ है।

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इसी दिन महाभारत युद्ध के दौरान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।

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इस वर्ष 'गीता जयंती' 22 दिसंबर 2023, शुक्रवार को मनाई जाएगी।

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गीता जयंती का दिन हिंदुओं की पवित्र पुस्तक श्रीमद्भगवद-गीता के जन्म का प्रतीक है।

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इस वर्ष गीता की 5160वीं वर्षगांठ है।

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इस दिन गीता, भगवान श्रीकृष्ण और वेदव्यासजी की पूजा करके यह त्योहार मनाया जाता है।

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कहा जाता है कि गीता में लिखे श्लोक स्वयं श्रीकृष्ण के मुख से निकले हैं, जो आज भी मानव कल्याण में सहायक सिद्ध होते हैं।

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वेदों और उपनिषदों का सार: गीता एक पवित्र ग्रंथ है जो इस लोक और परलोक दोनों में शुभ मार्ग दिखाता है।

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गीता के उपदेशों में इतनी शक्ति है कि इसका पालन करने वाला व्यक्ति अच्छे और बुरे का फर्क समझ पाता है।

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इसके श्लोक कलयुग में जीवन जीने की कला सिखाते हैं।

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यही कारण है कि 'गीता जयंती' के दिन गीता का पाठ करने से श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और सभी दुख दूर हो जाते हैं।

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