By: Simran Singh
NavBharat Live Desk
महंगे पेट्रोल-डीजल और बढ़ते प्रदूषण के बीच इलेक्ट्रिक और फ्लेक्स फ्यूल कारें तेजी से लोगों की पसंद बन रही हैं।
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फ्लेक्स फ्यूल कारें सामान्य पेट्रोल कारों पर आधारित होती हैं, इसलिए इनकी शुरुआती कीमत आमतौर पर इलेक्ट्रिक कारों से कम होती है। नतीजा: भारी जुर्माना और कार्रवाई।
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इलेक्ट्रिक कारों में महंगी बैटरी लगी होती है। सरकारी सब्सिडी के बावजूद इनकी शुरुआती कीमत अक्सर ज्यादा रहती है।
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इलेक्ट्रिक कार को घर पर चार्ज किया जा सकता है, जिससे प्रति किलोमीटर खर्च काफी कम हो जाता है।
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फ्लेक्स फ्यूल कारें इथेनॉल पर चलती हैं। इथेनॉल पेट्रोल से सस्ता है, लेकिन इसका माइलेज थोड़ा कम हो सकता है।
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EV में इंजन ऑयल और गियरबॉक्स जैसी चीजें नहीं होतीं, इसलिए नियमित सर्विसिंग का खर्च कम रहता है।
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फ्लेक्स फ्यूल कार की रीसेल पारंपरिक कारों जैसी हो सकती है, जबकि EV की कीमत काफी हद तक उसकी बैटरी की स्थिति पर निर्भर करती है।
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कम बजट = फ्लेक्स फ्यूल कार, ज्यादा डेली रनिंग और कम खर्च = इलेक्ट्रिक कार
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अगर आपका फोकस कम शुरुआती कीमत पर है तो Flex Fuel Car चुनें। अगर आप लंबे समय में ईंधन और मेंटेनेंस का खर्च बचाना चाहते हैं, तो Electric Car बेहतर विकल्प है।
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