By: Simran Singh
NavBharat Live Desk
भारत में बढ़ते प्रदूषण और सख्त नियमों के चलते कई राज्यों में 10 साल पुरानी डीजल और पुरानी पेट्रोल गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। ऐसे में EV कन्वर्जन एक नया विकल्प बनकर सामने आया है।
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रेट्रोफिटिंग में कार का पेट्रोल या डीजल इंजन, फ्यूल टैंक और गियरबॉक्स हटाकर उसकी जगह इलेक्ट्रिक मोटर, कंट्रोलर और लिथियम-आयन बैटरी लगाई जाती है। नतीजा: भारी जुर्माना और कार्रवाई।
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यह काम केवल ARAI से मान्यता प्राप्त कंपनियां करती हैं। वे सरकार द्वारा स्वीकृत EV Conversion Kit का इस्तेमाल करती हैं, जिससे गाड़ी सुरक्षित और कानूनी रूप से तैयार होती है।
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रेट्रोफिटिंग के बाद आपकी पुरानी कार बिना कबाड़ बने नई इलेक्ट्रिक कार जैसी ड्राइविंग का अनुभव देती है। इससे पुरानी गाड़ी की उपयोगिता भी बढ़ जाती है।
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अगर छोटी हैचबैक कार को कम रेंज के लिए EV में बदलवाते हैं तो खर्च करीब 3 से 6 लाख रुपये तक आ सकता है।
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200–300 किलोमीटर की रेंज वाला बड़ा बैटरी पैक चुनने पर खर्च 10 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में नई EV खरीदना भी एक विकल्प हो सकता है।
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EV Conversion से पहले RTO में पुराना रजिस्ट्रेशन अपडेट करवाना होता है। कन्वर्जन केवल अधिकृत एजेंसी से ही करवाना चाहिए।
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RTO इंस्पेक्शन के बाद RC में वाहन को इलेक्ट्रिक व्हीकल के रूप में दर्ज किया जाता है और गाड़ी को ग्रीन नंबर प्लेट मिलती है। इसके बाद कार पूरी तरह कानूनी रूप से मान्य हो जाती है।
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अगर आपकी कार अच्छी कंडीशन में है तो EV Conversion एक अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन ज्यादा खर्च होने पर नई इलेक्ट्रिक कार खरीदना आर्थिक रूप से अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है।
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