By: Simran Singh
NavBharat Live Desk
सड़क पर दौड़ती हर कार, बाइक या बस… सबके टायर काले ही क्यों होते हैं? क्या ये सिर्फ फैशन या डिजाइन का ट्रेंड है? सच जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे!
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20वीं सदी की शुरुआत में जब पहली बार रबर के टायर बने, तब उनका रंग सफेद या हल्का क्रीम जैसा होता था। प्राकृतिक रबर अपने शुद्ध रूप में दूधिया सफेद होता है। लेकिन समस्या ये थी कि ये टायर जल्दी घिस जाते थे और ज्यादा मजबूत नहीं थे।
टायर इंडस्ट्री में क्रांति तब आई जब कंपनियों ने रबर में “कार्बन ब्लैक” मिलाना शुरू किया। कार्बन ब्लैक एक बेहद बारीक काला पाउडर होता है, जिसे पेट्रोलियम पदार्थों को नियंत्रित तरीके से जलाकर बनाया जाता है।
कार्बन ब्लैक मिलाने से टायर पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बन गए। अब वे भारी वजन, तेज रफ्तार और खराब सड़कों पर भी बेहतर प्रदर्शन करने लगे। यानी काला रंग सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि मजबूती की पहचान है।
जब गाड़ी चलती है तो टायर और सड़क के बीच रगड़ से गर्मी पैदा होती है। ज्यादा गर्मी रबर को कमजोर कर सकती है। कार्बन ब्लैक इस गर्मी को फैलाने और बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे टायर सुरक्षित और लंबी उम्र वाले बनते हैं।
सूरज की पराबैंगनी (UV) किरणें और हवा रबर को समय के साथ फाड़ सकती हैं। कार्बन ब्लैक एक ढाल की तरह काम करता है और टायर को इन नुकसानदायक तत्वों से बचाता है। इसी वजह से टायर सालों तक टिके रहते हैं।
सिद्धांत रूप से टायर रंगीन बनाए जा सकते हैं। लेकिन अगर कार्बन ब्लैक की जगह दूसरे रंग मिलाए जाएं, तो टायर की मजबूती और टिकाऊपन कम हो जाएगा।
कुछ खास डिजाइन में सफेद किनारे या रंगीन साइडवॉल दिखते हैं, लेकिन सड़क से टकराने वाला हिस्सा हमेशा काला ही होता है।
जब भी अगली बार आप किसी गाड़ी का काला टायर देखें, तो समझिए ये सिर्फ रंग नहीं, बल्कि विज्ञान, सुरक्षा और लंबी उम्र की गारंटी है।