By: Simran Singh
NavBharat Live Desk
आज लोग सिर्फ माइलेज और फीचर्स नहीं, बल्कि कार की Safety Rating देखकर भी फैसला लेने लगे हैं।
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पिछले कुछ सालों में हुए सड़क हादसों और क्रैश टेस्ट रिपोर्ट्स ने ग्राहकों की सोच बदल दी है। अब लोग 4 और 5 स्टार रेटिंग वाली कारों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
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किसी भी कार को Safety Rating देने से पहले उसे कई कठिन टेस्ट से गुजरना पड़ता है। ये टेस्ट असली सड़क हादसों जैसी परिस्थितियों में किए जाते हैं।
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इस टेस्ट में कार को तय स्पीड पर सामने से कठोर दीवार या बैरियर से टकराया जाता है ताकि यात्रियों की सुरक्षा जांची जा सके।
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इन टेस्ट में देखा जाता है कि साइड से टक्कर लगने या पोल से टकराने पर कार कितनी सुरक्षा देती है।
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कार में इंसानों की जगह सेंसर लगी डमी बैठाई जाती हैं। ये सेंसर बताते हैं कि हादसे के दौरान शरीर पर कितना असर पड़ सकता है।
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अगर कार का Airbag सिस्टम, Seat Belt और बॉडी स्ट्रक्चर बेहतर सुरक्षा देते हैं, तो कार को ज्यादा सेफ्टी स्कोर मिलता है।
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आजकल सिर्फ बॉडी स्ट्रक्चर नहीं, बल्कि Electronic Stability Control, ADAS और Child Safety Features भी Safety Rating में शामिल किए जाते हैं।
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Global NCAP, Euro NCAP, ASEAN NCAP और Bharat NCAP जैसी एजेंसियां कारों की सुरक्षा जांचती हैं। भारत में अब Bharat NCAP भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
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