कार को कैसे मिलती है Safety Rating
कार की Safety बड़ी प्राथमिकता
आज लोग सिर्फ माइलेज और फीचर्स नहीं, बल्कि कार की Safety Rating देखकर भी फैसला लेने लगे हैं।
Safety Rating की अहमियत?
पिछले कुछ सालों में हुए सड़क हादसों और क्रैश टेस्ट रिपोर्ट्स ने ग्राहकों की सोच बदल दी है। अब लोग 4 और 5 स्टार रेटिंग वाली कारों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
आखिर कैसे मिलती है Safety Rating?
किसी भी कार को Safety Rating देने से पहले उसे कई कठिन टेस्ट से गुजरना पड़ता है। ये टेस्ट असली सड़क हादसों जैसी परिस्थितियों में किए जाते हैं।
Front Crash Test क्या होता है?
इस टेस्ट में कार को तय स्पीड पर सामने से कठोर दीवार या बैरियर से टकराया जाता है ताकि यात्रियों की सुरक्षा जांची जा सके।
Side Crash और Pole Impact Test
इन टेस्ट में देखा जाता है कि साइड से टक्कर लगने या पोल से टकराने पर कार कितनी सुरक्षा देती है।
Crash Test में डमी का इस्तेमाल कैसे होता है?
कार में इंसानों की जगह सेंसर लगी डमी बैठाई जाती हैं। ये सेंसर बताते हैं कि हादसे के दौरान शरीर पर कितना असर पड़ सकता है।
Airbags और Seat Belt
अगर कार का Airbag सिस्टम, Seat Belt और बॉडी स्ट्रक्चर बेहतर सुरक्षा देते हैं, तो कार को ज्यादा सेफ्टी स्कोर मिलता है।
अब ADAS और Child Safety भी अहम
आजकल सिर्फ बॉडी स्ट्रक्चर नहीं, बल्कि Electronic Stability Control, ADAS और Child Safety Features भी Safety Rating में शामिल किए जाते हैं।
कौन-कौन सी एजेंसियां देती हैं Rating?
Global NCAP, Euro NCAP, ASEAN NCAP और Bharat NCAP जैसी एजेंसियां कारों की सुरक्षा जांचती हैं। भारत में अब Bharat NCAP भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

