By: Preeti Sharma
NavBharat Live Desk
भारत में गुलाल से होली नहीं बल्कि कहीं लाठियां चलती हैं तो कहीं श्मशान की राख से होली होती है।
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मथुरा के बरसाना में महिलाएं पुरुषों पर लाठियां बरसाती हैं और पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं।
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चिता की भस्म से होली खेली जाती है।
निहंग सिख तलवारबाजी और घुड़सवारी जैसे जांबाज प्रदर्शनों से होली मनाते हैं।
बंगाल में इसे डोल उत्सव कहते हैं। लोग बसंत के स्वागत में पीले कपड़े पहनकर नृत्य करते हैं।
विदेशी मेहमानों के बीच प्रसिद्ध इस होली में पारंपरिक लोक नृत्य और शाही जुलूस निकलता है।
मणिपुर में यह त्योहार 5 दिनों तक चलता है। यहां की मुख्य विशेषता थबल चोंगबा नृत्य है।
दक्षिण भारत की यह होली बेहद शांत और शुद्ध होती है। यहां लोग हल्दी के पानी से होली खेलते हैं।