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जनगणना ड्यूटी का असर, 10वीं पास छात्रों की बढ़ी परेशानी, टीसी के लिए स्कूलों के चक्कर

Nagpur Census Duty: नागपुर में 10वीं के परिणाम घोषित होने के एक माह बाद भी कई विद्यार्थियों को टीसी नहीं मिल रही है। जनगणना कार्य में व्यस्त शिक्षक छात्रों को बाद में आने को कह रहे हैं।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Jun 09, 2026 | 04:00 PM

10वीं परिणाम, टीसी समस्या, जनगणना ड्यूटी,(सोर्स: सौजन्य AI)

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Nagpur School Administration: नागपुर जिले में 10वीं कक्षा के परिणाम घोषित हुए एक माह से अधिक समय बीत चुका है। अंकसूची और प्रमाणपत्र डिजिलॉकर पर उपलब्ध भी हो चुके हैं लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए बेहद जरूरी टीसी प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों और उनके पालकों को अब भी स्कूलों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

जिले के कई स्कूलों में शिक्षक इन दिनों जनगणना कार्य में व्यस्त होने के कारण विद्यार्थियों को ’15 जून के बाद आइए’ कहकर वापस भेज रहे हैं। ऐसे में हजारों विद्यार्थियों के 11वीं तथा अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रभावित होने की आशंका बन गई है। इन विद्यार्थियों का भविष्य संकट में घिर गया है।

जिले में इस साल 56,388 विद्यार्थियों ने 10वीं की परीक्षा दी। इनमें से 52,693 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थी आगे की पढ़ाई के लिए प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होने वाले हैं लेकिन प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के लिए स्कूलों के पास कोई प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है। शिक्षा क्षेत्र में चर्चा है कि इस अव्यवस्था का असर 50,000 से अधिक विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है।

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‘डमी स्कूल संस्कृति’ का खेल तो नहीं?

शिक्षा क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि इस स्थिति के पीछे राज्य में बढ़ती कोचिंग संस्कृति का भी अप्रत्यक्ष संबंध हो सकता है। 11वीं और 12वीं के अनेक विद्यार्थी केवल कागजों पर स्कूल या जूनियर कॉलेज में नामांकित रहते हैं, जबकि वास्तविक पढ़ाई निजी कोचिंग संस्थानों में ही करते हैं।

इसके कारण कई स्कूलों की कक्षाएं खाली रहने लगी हैं और शिक्षा व्यवस्था में यह विकृति लगातार बढ़ रही है। कुछ अभिभावकों ने आशंका जताई है कि समय पर टीसी जारी नहीं कर विद्यार्थियों को इसी ‘डमी स्कूल संस्कृति’ के लिए रोकने का प्रयास किया जा रहा है।

विद्यार्थियों को प्रवेश से वंचित होने का डर

आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों ने अपने बच्चों को कोचिंग संस्थानों में दाखिला दिलाकर वैकल्पिक व्यवस्था कर ली है लेकिन सामान्य और मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र न मिलने से प्रवेश प्रक्रिया में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

केंद्रीकृत प्रवेश प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं होने पर मेधावी विद्यार्थियों को भी अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान में प्रवेश से वंचित होना पड़ सकता है। वहीं पालकों मांग की है कि विद्यार्थियों का शैक्षणिक नुकसान रोकने के लिए शिक्षा विभाग तत्काल हस्तक्षेप करें और सभी स्कूलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर टीसी तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज वितरित करने के निर्देश जारी करे।

बढ़ता जाल खतरे की घंटी

निजी कोचिंग संस्थानों का बढ़ता जाल शिक्षा व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी साबित हो रहा है। समाज के करदाताओं के पैसे से खड़ी की गई सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और प्रभावी बनाए रखने की जिम्मेदारी शासन की है लेकिन कई स्थानों पर निजी कोचिंग संस्कृति तेजी से हावी होती जा रही है। इसका परिणाम यह हो रहा है कि मूलभूत शिक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ती जा रही है।

यह भी पढ़ें:-30 साल से बसे परिवारों पर संकट? नागपुर मिहान की नाप-जोख से 300 परिवारों में दहशत, निवासियों ने उठाए सवालC

ऐसे में मेधावी विद्यार्थियों को समय पर टीसी नहीं मिलना केवल प्रशासनिक लापरवाही है या इसके पीछे कोई सुनियोजित तंत्र काम कर रहा है, इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले कारणों और जिम्मेदारों को सामने लाया जा सके।

-शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, पूर्व विधायक, नागो गाणार

Class 10 students facing tc delay due to nagpur census duty

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Published On: Jun 09, 2026 | 04:00 PM

Topics:  

  • Census
  • Education News
  • Maharashtra News
  • Nagpur News

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