भंडारा चुनाव (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Bhandara Elections: नगर परिषद चुनाव का महामुकाबला अब पूरी तरह गरमा चुका है। सियासी अखाड़े में पुराने दिग्गज फिर से कूद पड़े हैं, तो दूसरी ओर कई नए चेहरे भी दमदार चुनौती पेश करते दिखाई दे रहे हैं। साढ़े तीन साल के लंबे अंतराल के बाद होने वाले इस चुनाव में पूर्व नगरसेवकों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
नगर परिषद के सभागृह तक पहुंचने के लिए ये नेता पिछले कई दिनों से जनता के दरबार में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। लेकिन सियासी अखाड़े में राजनीतिक गणित इस कदर उलझा है कि दिग्गज भी गहराई तक फंसे महसूस कर रहे हैं। नगर परिषद के 17 प्रभागों से कुल 35 सदस्य चुने जाएंगे। इस बार ज्यादातर पूर्व नगरसेवक फिर मैदान में उतरे हैं। कई नेताओं के लिए यह चुनाव उनकी प्रतिष्ठा का संघर्ष है।
अनुभव भले ही भारी हो, मगर जनता के मूड को परखना इस बार बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होने वाला है। कुछ पूर्व नगरसेवकों ने अपने कार्यकाल में अध्ययन आधारित मुद्दे उठाकर सभागृह में दखल दर्ज कराई थी। अब वही अनुभव थामे वे एक बार फिर जनता से समर्थन मांग रहे हैं। मतदाता किसके काम को याद रखते हैं और किसे नकारते हैं, यह 3 दिसंबर को सामने आएगा।
पुराने नगरसेवक अपने प्रभाग के मतदाताओं की नब्ज अच्छे से जानते हैं। कौन समर्थक, कौन विरोधी, किस क्षेत्र में ताकत लगानी है। इसका पूरा गणित उनके पास पहले से तैयार है। वहीं पहली बार मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों को शुरुआत से हर तैयारी खुद करनी पड़ रही है। इसके बावजूद नए चेहरों की ओर से कई प्रभागों में दिग्गजों को सीधी टक्कर दे रहे है।
यह भी पढ़ें – प्रचार के लिए मजदूरों की एडवांस बुकिंग शुरू, चुनावी मौसम में हाई डिमांड, गुटबाजी का भी दिखा असर
प्रभागों के आरक्षण ने कई पुराने नगरसेवकों का रास्ता रोक दिया है। ऐसे में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने के लिए इन नेताओं ने अपनी पत्नियों और परिवार के अन्य सदस्यों को चुनाव मैदान में उतारा है। अब परिवार के दम पर राजनीतिक वर्चस्व बचाने की कोशिश हो रही है।
पुरानों का अनुभव जीतेगा या नए चेहरों की ताजगी,यह बड़ा सवाल है। जनता किसे मौका देती है, यह चुनाव नतीजों के दिन तय होगा। फिलहाल तो भंडारा की सियासत में गर्मी चरम पर है और हर प्रभाग में मुकाबला नेक्स्ट-टू-नेक पहुंच चुका है।