नासिक विधान परिषद चुनाव: निर्विरोध की आहट से नगरसेवकों में नाराजगी, एक वोट के लिए 10 लाख रुपये की चर्चा गर्म
Nashik MLC Election: नासिक विधान परिषद चुनाव में महायुति के कारण निर्विरोध की चर्चा से नाराज नगरसेवकों ने अलग उम्मीदवार का बनाया दबाव; एक वोट के लिए 10 लाख रुपये के लेन-देन की चर्चा गर्म।
- Written By: रूपम सिंह
नासिक विधान परिषद चुनाव (सोर्स- सोशल मीडिया)
Nashik MLC Election Local Authorities Constituency: विधान परिषद स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव की पृष्ठभूमि में नासिक जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। वहीं, दूसरी ओर मनपा, नगरपालिका और नगर पंचायतों के नगरसेवकों में भारी नाराजगी की चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस चुनाव में मतदाता रहने वाले नगरसेवकों को बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभमिलता है।
लेकिन इस बार महायुति के एकजुट होकर चुनाव लड़ने की संभावना के चलते चुनाव निर्विरोध या एकतरफा होने के संकेत हैं। इसी वजह से चुनाव मुकाबले वाला होना चाहिए इस मांग को लेकर कई नगरसेवक अपने-अपने दलों पर अलग उम्मीदवार उतारने का दबाव बना रहे हैं। इस निर्वाचन क्षेत्र में नगर निगम, नगरपालिका और नगर पंचायतों के कुल 623 नगरसेवक मतदाता हैं।
एक वोट के लिए 10 लाख रुपये की चर्चा
हाल ही में हुए स्थानीय स्वराज्य संस्था चुनावों में कई नगरसेवकों ने भारी खर्च कर जीत हासिल की थी। ऐसे में अब विधान परिषद चुनाव के जरिए खर्च वसूल करने की मानसिकता कुछ नगरसेवकों में दिखाई दे रही है। 2018 के चुनाव में महानगरपालिका के एक वोट के लिए पांच लाख रुपये, नगरपालिका के नगरसेवक के लिए 3 लाख रुपये, जबकि नगर पंचायत, जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए 2 लाख रुपये तक के लेन-देन की चर्चा राजनीतिक हलकों में थी। इस बार जिला परिषद चुनाव नहीं होने के कारण केवल नगरसेवक ही मतदाता हैं।
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ऐसे में एक वोट के लिए दस लाख रुपये तक रेट पहुंचने की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। कुल 623 मतदाताओं में भाजपा के पास 190, शिंदे गुट के पास 171 और अजित पवार गुट के पास 107 वोट हैं। वहीं ठाकरे गुट के पास 45, कांग्रेस के पास 13, इस्लाम पार्टी के पास 35, एआईएमआईएम के पास 21 और अन्य के पास 41 वोट हैं। ऐसे में महायुति एकजुट रही तो जीत आसान मानी जा रही है। लेकिन यदि सीट बंटवारे को लेकर अंदरूनी संघर्ष बढ़ा, तो नगरसेवकों की चांदी होने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में जोरों पर है।
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सीट बंटवारे को लेकर महायुति में खींचतान
फिलहाल यह सीट शिवसेना के शिंदे गुट के पास है और इसे भाजपा को दिए जाने की चर्चा चल रही है। इससे पहले इसी सीट से शिवसेना के नरेंद्र दराडे विधान परिषद के लिए चुने गए थे। इसलिए शिंदे गुट चाहता है कि यह सीट फिर से शिवसेना को मिले और दराडे को ही उम्मीदवार बनाया जाए। दूसरी ओर भाजपा ने भी इस सीट पर जोरदार दावा ठोक दिया है। यदि महायुति के तीनों दल एकजुट होकर चुनाव लड़ते हैं, तो जीत आसान मानी जा रही है। लेकिन इससे वोटों की कीमत कम होने की आशंका नगरसेवकों को सता रही है। इसी कारण कई नगरसेवकों की नजर अब त्रिकोणीय या स्वतंत्र मुकाबले पर टिकी हुई है।
