आज मनाया जा रहा है ‘भुजरिया’ महापर्व, जानिए किस क्षेत्र का है यह त्योहार और क्यों मनाया जाता है पूरे उल्लास के साथ
- Written By: वैष्णवी वंजारी
सीमा कुमारी
नई दिल्ली: आज यानी शुक्रवार को ‘भुजरिया’ (Bhujriya 2023) का पावन पर्व मनाया जाएगा। ‘भुजरिया’ हर साल रक्षाबंधन के दूसरे दिन मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से बुंदेलखंड का लोक पर्व है। इसे कजलियों का पर्व भी कहते हैं। अच्छी बारिश, फसल एवं सुख-समृद्धि की कामना के लिए यह पर्व मनाया जाता है। आइए जानें इस बारे में-
जानकारी के अनुसार, अच्छी बारिश, फसल एवं सुख-समृद्धि की कामना के लिए रक्षाबंधन के दूसरे दिन भुजरिया पर्व मनाया जाता है। इस दिन जल स्रोतों में गेहूं के पौधों का विसर्जन किया जाता है। छोटी-छोटी बांस की टोकरियों में मिट्टी की तरह बिछाकर गेहूं या जौं के दाने बोए जाते हैं। इसके बाद इन्हें रोजाना पानी दिया जाता है। सावन के महीने में इन भुजरियों को झूला देने का रिवाज भी है। तकरीबन एक सप्ताह में ये अन्न उग आता है, जिन्हें ‘भुजरिया’ कहा जाता है।
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इन भुजरियों की पूजा अर्चना की जाती है एवं कामना की जाती है, कि इस साल बारिश बेहतर हो, जिससे अच्छी फसल मिल सकें। श्रावण मास की पूर्णिमा तक ये भुजरिया चार से छह इंच की हो जाती हैं।
रक्षाबंधन के दूसरे दिन इन्हें एक-दूसरे को देकर शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद देते हैं। बुजुर्गों के मुताबिक ये भुजरिया नई फसल का प्रतीक है। रक्षाबंधन के दूसरे दिन महिलाएं इन टोकरियों को सिर पर रखकर जल स्रोतों में विसर्जन के लिए ले जाती हैं।
