अंकिता पटेल
World Smile Day हर साल अक्टूबर महीने के पहले शुक्रवार को मनाया जाता है। यह कोई तय तारीख नहीं, बल्कि दिन के हिसाब से तय होने वाला एक अनोखा उत्सव है।
इस दिन की कहानी जुड़ी है अमेरिकी कमर्शियल आर्टिस्ट हार्वे बॉल से, जिन्होंने 1963 में वह मशहूर पीला स्माइली फेस डिजाइन किया था, जो आज दुनिया का सबसे पहचाना जाने वाला प्रतीक बन चुका है।
मैसाचुसेट्स के वर्सेस्टर शहर में अपनी विज्ञापन एजेंसी चला रहे हार्वे बॉल ने एक इंश्योरेंस कंपनी के कर्मचारियों का हौसला बढ़ाने के लिए यह सिंपल स्माइली चिन्ह बनाया था।
समय के साथ यह स्माइली चिन्ह दुनियाभर में इतना मशहूर हो गया कि इसका व्यावसायिक इस्तेमाल बेतहाशा बढ़ गया। हार्वे बॉल को चिंता होने लगी कि इसका असली मकसद और भावना कहीं खो न जाए।
इसी चिंता से निकला एक विचार, और 1999 में हार्वे बॉल ने तय किया कि हर साल अक्टूबर का पहला शुक्रवार पूरी तरह मुस्कान और दयालुता के छोटे-छोटे कामों को समर्पित होगा।
हार्वे बॉल का मानना था कि स्माइली फेस किसी राजनीति, धर्म या भूगोल को नहीं जानता। उनका सपना था कि साल में कम से कम एक दिन पूरी दुनिया भी इसी तरह निष्पक्ष और सरल बनकर मुस्कुराए।
2001 में हार्वे बॉल का निधन हो गया, लेकिन उनकी याद में बनी "हार्वे बॉल वर्ल्ड स्माइल फाउंडेशन" आज भी हर साल इस दिन को प्रायोजित करती है और उनकी सोच को जिंदा रखे हुए है।
"किसी एक इंसान को मुस्कुराने में मदद करें" यही इस दिन की थीम हर साल बनी रहती है, जो लोगों को छोटे-छोटे दयालुता भरे कामों के लिए प्रेरित करती है।
किसी अजनबी को मुस्कुराकर नमस्ते कहें, किसी की मदद करें, या सोशल मीडिया पर स्माइली इमोजी के साथ अपनी खुशी शेयर करें। याद रखें, एक छोटी-सी मुस्कान भी किसी का पूरा दिन बदल सकती है।