प्रीति शर्मा
अक्सर देर रात तक फोन चलाने की वजह से हमारी नींद उड़ जाती है।
स्मार्टफोन से ब्लू लाइट निकलती है। यह रोशनी आपके दिमाग को संकेत देती है कि अभी दिन है।
अंधेरा होने पर शरीर मेलाटोनिन हार्मोन बनाता है। मोबाइल की रोशनी ऐसा करने से रोकती है।
सोशल मीडिया स्क्रॉल करने या वीडियो देखने से दिमाग हाइपर अलर्ट हो जाता है।
अंधेरे में तेज रोशनी देखने से आंखों की मांसपेशियों पर भारी दबाव पड़ता है।
रील और शॉर्ट्स का इंफिनिटी लूप आपको समय का अहसास नहीं होने देता।
रात की अधूरी नींद के कारण अगली सुबह सिरदर्द, भारीपन और चिड़चिड़ापन रहता है।
अगर आप सुकून की नींद चाहते हैं तो सोने से करीब एक घंटे पहले फोन को दूर कर दें।