दीपिका पाल
दिवाली के त्योहार में दीयें और पटाखे जलाते है और खुशियों को बांटने वाला त्योहार है।
इस राज्य के 7 गांव में दिवाली पर सिर्फ एक दीया जलाया जाता है और साइलेंट माहौल होता है।
नजदीकी पक्षी अभयारण्य में पक्षियों के संरक्षण के लिए दिवाली यहां नहीं मनाते है।
दिवाली के मौके पर पिछले 22 सालों से दिवाली पर पटाखे नहीं फोड़कर दिवाली मनाई जाती है।
सेलप्पमपलयम, वदामुगम वेल्लोड, सेम्मांडमपालयम, करुक्कनकट्टू वलासु, पुंगमपाडी और दो अन्य गांवों में दिवाली नहीं मनती है।
पक्षी अभयारण्य के आसपास रहने वाले इन परिवारों ने पटाखें नहीं फोड़ने का संकल्प लिया है।
बच्चों के लिए नए कपड़े से लेकर दीप जलाने और फुलझड़ियां जलाने की अनुमति है।