सुनीता पांडे
बिहार के गया में स्थित यह दुनिया का एकमात्र मंदिर है, जहां आत्म पिंडदान किया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति अपना पिंड दान देता है, उसे अगली दुनिया में मोक्ष मिलता है।
वायु पुराण, गरुड़ पुराण और विष्णु पुराण में इस स्थान को मोक्ष भूमि और मोक्ष स्थली कहा गया है।
हजारों साल पुराने इस मंदिर का नाम 'विष्णु जनार्दन स्वामी मंदिर' है।
इस मंदिर की खासियत यह है कि एक चट्टान पर बना यह भगवान विष्णु की जनार्धन के रूप में प्रतिमा है।
जो लोग पिंडदान करते हैं वे स्वयं भगवान विष्णु के दाहिने हाथ में पिंड अर्पित करते हैं।
इस मंदिर में जनार्दन रूप में भगवान विष्णु पिंड स्वीकार करने की मुद्रा में हैं और उनका हाथ खुला है, जिसमें वे आत्म पिंडदान स्वीकार करते हैं।
यह मंदिर गया जी की 45 वेदियों में से एक वेदी के रूप में विख्यात है।
आत्म पिंडदान करने के बाद संबंधित व्यक्ति को धार्मिक तौर पर दान कर्मकांड करने पड़ते हैं, जो आत्म पिंडदान के तुरंत बाद किया जाता है।
आत्म पिंडदान करने का एक कारण यह भी है कि जिनकी कोई संतान नहीं होती, वे यह कार्य स्वयं करते हैं, ताकि मृत्यु के बाद उन्हें मोक्ष मिल सके।
इस मंदिर की एक अनोखी मान्यता यह भी है कि यहां आने वाले लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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