सिमरन सिंह
छोटी सी पेन ड्राइव में हजारों फाइलें सेव हो जाती हैं। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है इसमें बने दो छोटे-छोटे छेदों पर? ज्यादातर लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।
अगर आपको लगता है कि ये छेद सिर्फ स्टाइल के लिए हैं, तो आप गलत हैं। इनका सीधा कनेक्शन पेन ड्राइव की सेफ्टी और परफॉर्मेंस से है।
जब पेन ड्राइव USB पोर्ट में लगती है, तो पोर्ट के अंदर मौजूद मेटल उभार इन दो चौकोर छेदों में फिट होते हैं, जिससे कनेक्शन सही बनता है।
अक्सर लोग पेन ड्राइव उल्टी लगाने की कोशिश करते हैं। इन छेदों से आप पहचान सकते हैं जिस तरफ से छेद आर-पार दिखते हैं, वही सही साइड होती है।
अगर पेन ड्राइव ढीली रही तो डेटा ट्रांसफर रुक सकता है। ये छेद पेन ड्राइव को पोर्ट में मजबूती से टिकाए रखते हैं, जिससे फाइल ट्रांसफर स्मूद रहता है।
सही फिटिंग न हो तो फाइल करप्ट होने का खतरा रहता है। ये छोटे छेद पेन ड्राइव को सेफ और स्टेबल कनेक्शन देते हैं।
USB का डिजाइन किसी एक कंपनी का नहीं। इसे तय करती है USB-IF नाम की ग्लोबल संस्था, जिसे पूरी दुनिया फॉलो करती है।
ये छेद अंदर के प्लास्टिक ढांचे को बाहरी मेटल बॉडी से मजबूती से जोड़ते हैं। इससे पेन ड्राइव जल्दी खराब नहीं होती।