सिमरन सिंह
1957 में Hindustan Motors ने Ambassador का प्रोडक्शन शुरू किया। मजबूत बॉडी, बड़ा केबिन और शानदार रोड प्रेजेंस के कारण यह नेताओं, कारोबारियों और सरकारी अधिकारियों की पसंद बनी।
1981 में Maruti Suzuki की शुरुआत हुई। मकसद था ऐसी कार लाना, जिसे आम भारतीय परिवार भी आसानी से खरीद सके। यही सोच आगे चलकर भारतीय कार बाजार की दिशा बदलने वाली साबित हुई।
1983 में Maruti 800 भारतीय बाजार में उतरी। छोटी, किफायती और शहरों में आसानी से चलने वाली इस कार ने मिडिल क्लास परिवारों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की।
शुरुआती कीमत करीब ₹47,500 थी। इसकी किफायती कीमत और आसान इस्तेमाल ने कार को सिर्फ अमीरों की चीज नहीं रहने दिया। कई परिवारों के लिए Maruti 800 पहली कार बनी।
समय के साथ भारतीय ग्राहकों की पसंद बदली। Alto, WagonR, Swift, Dzire और Ertiga जैसे मॉडल लोकप्रिय हुए। ग्राहकों ने बेहतर डिजाइन, आराम, फीचर्स और परफॉर्मेंस को भी महत्व देना शुरू किया।
आकर्षक डिजाइन, अच्छी ड्राइविंग फील और किफायती कीमत ने Swift को खासतौर पर युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाया। इस दौर में कार सिर्फ जरूरत नहीं, स्टाइल स्टेटमेंट भी बनने लगी।
SUV की बढ़ती लोकप्रियता के साथ Brezza, Fronx, Jimny और Grand Vitara जैसे मॉडल बाजार में आए। ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस, स्पेस और रोड प्रेजेंस ने SUV को भारतीय परिवारों की पसंद बना दिया।
भारतीय ऑटो बाजार तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रहा है। Maruti Suzuki भी इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक फ्यूल तकनीक पर फोकस कर रही है। कंपनी की पहली इलेक्ट्रिक कार के साथ EV सेगमेंट में भी कदम बढ़ चुका है।
आजादी के बाद भारत की कार कहानी सिर्फ मॉडलों के बदलने की कहानी नहीं है। यह बदलती भारतीय जरूरतों, बढ़ती आमदनी और नई तकनीक की कहानी भी है। अब सवाल है अगले 10 सालों में भारतीय सड़कों की तस्वीर कितनी बदलेगी?