रीता राय सागर
बाजार में मौजूद असली-नकली पनीर के बीच अंतर कर पाना लगभग कठिन है। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर सिंथेटिक पनीर को पहचाना जा सकता है।
सिंथेटिक या एनालॉग पनीर दूध से नहीं बनता। इसमें वेजिटेबल ऑयल, स्टार्च, इमल्सीफायर और दूसरे एडिटिव्स का इस्तेमाल करके पनीर जैसा टेक्सचर बनाया जाता है।
सिंथेटिक पनीर बनाने के पीछे एक बड़ी वजह कम लागत है। दूध से बने पनीर की तुलना में कुछ एनालॉग प्रोडक्ट सस्ते पड़ते हैं।
असली पनीर आमतौर पर नरम और थोड़ा भुरभुरा होता है। वहीं नकली या एनालॉग पनीर ज्यादा चिकने, सख्त या रबड़ जैसे महसूस हो सकते हैं।
पनीर का छोटा टुकड़ा गर्म पानी में डालकर उसकी बनावट और व्यवहार देखा जा सकता है। हालांकि, सिर्फ इस टेस्ट से पनीर के असली-नकली होने की पहचान मुश्किल है।
असली पनीर का स्वाद हल्का और क्रीमी होता है। एनालॉग पनीर का स्वाद अलग और ज्यादा ऑयली महसूस होता है।
दूध से बने पनीर में प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व मिलते हैं। एनालॉग पनीर में बिल्कुल भी पोषण नहीं होता है, क्यों कि इसे बनाने में पाम ऑयल और इम्लसिफायर जैसी चीजों का इस्तेमाल होता है।
असली पनीर दूध से बनाया जाता है। वहीं एनालॉग पनीर में वेजिटेबल ऑयल, स्टार्च और इमल्सीफायर जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।
अगर किसी उत्पाद में ज्यादा सैचुरेटेड फैट, ट्रांस फैट या अन्य एडिटिव्स हों, तो उसका बार-बार सेवन संतुलित डाइट के लिहाज से चिंता का विषय हो सकता है।
पनीर हमेशा भरोसेमंद जगह से खरीदें। पैकेट वाला पनीर लेते समय लेबल, सामग्री, FSSAI लाइसेंस और पैकिंग की जानकारी जरूर देखें।