सुनीता पांडे
आयुर्वेद में ऐसे कई पौधे और फूल-पत्तियां हैं जिनका उपयोग कुछ बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है।
ऐसा ही एक फूल है सहदेवी। इस फूल की खास बात यह है कि इन फूलों में बुखार, दर्द और कुछ घावों को ठीक करने के गुण होते हैं।
आयुर्वेद में सहदेवी के फूल का उपयोग दूध, पानी और तेल में मिलाकर किया जाता है।
यह एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है और इसका रस एंटी-इंफ्लेमेटरी के रूप में काम करता है।
सहदेवी एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है और इसका इस्तेमाल आप गठिया की समस्या में कर सकते हैं।
इस फूल को चंदन और घी के साथ पीसकर एक लेप तैयार कर सकते हैं और इसे अपने जोड़ों पर लगा सकते हैं।
इस फूल को चंदन और घी के साथ पीसकर एक लेप तैयार कर सकते हैं और इसे अपने जोड़ों पर लगा सकते हैं।
ये न्यूरल गतिविधियों को शांत करने के साथ ही इनसोम्निया (अनिद्रा) से बचाव में मददगार है।
सहदेवी के एंटीबैक्टीरियल फूलों का काढ़ा बनाकर पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।