अंकिता पटेल
साबूदाना मुख्य रूप से स्टार्च से भरपूर होता है। सीमित मात्रा में इसे खाया जा सकता है, लेकिन इसे रोजाना या बहुत अधिक मात्रा में खाने से आहार में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है।
साबूदाने में मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट होता है, जबकि प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और कई जरूरी खनिज अपेक्षाकृत कम होते हैं। इसलिए इसे संपूर्ण भोजन मानना सही नहीं है।
साबूदाना स्टार्च से भरपूर है और इसमें फाइबर कम होता है। बड़ी मात्रा में खाने पर यह रक्त शर्करा को तेजी से बढ़ा सकता है, खासकर मधुमेह वाले लोगों को मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।
साबूदाना स्वयं कोई मोटापा बढ़ाने वाला भोजन नहीं है, लेकिन इसकी बड़ी मात्रा और अधिक तेल, घी, मूंगफली या चीनी के साथ बनी डिश की कैलोरी काफी बढ़ सकती है।
साबूदाने में प्रोटीन और फाइबर कम होने के कारण इसे अकेले खाने से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस न हो। इससे कुछ लोगों को जल्दी भूख लग सकती है और वे ज्यादा खा सकते हैं।
साबूदाने में फाइबर की मात्रा कम होती है। यदि भोजन में साबूदाना ज्यादा और फल, सब्जियां व अन्य फाइबर वाले खाद्य पदार्थ कम हों, तो कब्ज की समस्या बढ़ सकती है।
उपवास के दौरान साबूदाना लोकप्रिय है, लेकिन केवल साबूदाना खाने से शरीर को पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर और सूक्ष्म पोषक तत्व नहीं मिलते।
साबूदाना खिचड़ी, वड़ा या अन्य व्यंजनों में तेल, घी और मूंगफली की मात्रा ज्यादा हो सकती है। ऐसे में एक सामान्य भोजन की तुलना में कुल कैलोरी काफी बढ़ सकती है।
कुछ लोगों को अधिक मात्रा में स्टार्चयुक्त भोजन खाने के बाद पेट फूलना, भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है। ऐसी परेशानी में शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें।
साबूदाना पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है। इसे उचित मात्रा में लें और साथ में प्रोटीन, सब्जियां, फल तथा अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें।