रीता राय सागर
ज्योतिष में किन नक्षत्रों को माना जाता है अशुभ, जानें वजह
वैदिक ज्योतिष में आकाश को 27 नक्षत्रों में बांटा गया है। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होता है, उसे जन्म नक्षत्र कहा जाता है। हर नक्षत्र की अपनी अलग प्रकृति और विशेषताएं होती हैं।
ज्योतिष में किसी एक नक्षत्र को हर परिस्थिति में सबसे खराब नहीं माना जाता। हालांकि मूल, अश्लेषा, ज्येष्ठा और मघा जैसे कुछ नक्षत्रों को उनकी विशेष प्रकृति के कारण कुछ कार्यों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
मूल नक्षत्र धनु राशि में आता है और इसका स्वामी केतु माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे तीव्र और परिवर्तनकारी प्रकृति वाला नक्षत्र माना जाता है। हालांकि इसे पूरी तरह अशुभ मानना सही नहीं है।
अश्लेषा कर्क राशि का नक्षत्र है और इसका स्वामी बुध माना जाता है। इसे रहस्यमयी और गहरी सोच से जुड़ा नक्षत्र माना जाता है। कुछ शुभ कार्यों के लिए इसे अनुकूल नहीं माना जाता।
ज्येष्ठा नक्षत्र वृश्चिक राशि में आता है। ज्योतिष के अनुसार इसका संबंध जिम्मेदारी, शक्ति और वरिष्ठता से माना जाता है। कुछ विशेष कार्यों में इसकी प्रकृति को चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
मघा नक्षत्र सिंह राशि से संबंधित है और इसका स्वामी केतु है। इसका संबंध पितरों और पूर्वजों से माना जाता है। इसकी ऊर्जा को गंभीर और प्रभावशाली माना जाता है।
केवल जन्म नक्षत्र के आधार पर किसी व्यक्ति को शुभ या अशुभ नहीं कहा जा सकता। जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति, लग्न, राशि, दशा और अन्य योगों को भी देखा जाता है।
किसी नक्षत्र को सबसे खराब कहना ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत जेनरलाइज करना होगा। किसी खास काम के लिए नक्षत्र की अनुकूलता अलग-अलग हो सकती है।
नक्षत्र को डर की वजह से नहीं, अपने बारे में समझने के लिए ज्योतिष को एक माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए।