मनोज पांडे
स्वच्छ भारत बनाने के लिए पूरे देश में स्वच्छता अभियान को काफी गति मिली है। स्वच्छता अभियान के तहत लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाता है।
सरकार भी अक्सर सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई की बात करती है। लेकिन शहरों से लेकर रेलवे स्टेशन तक साफ-सफाई नजर आ रही है।
सार्वजनिक रेलवे स्टेशन पर गुटखा थूकने की दर सबसे ज्यादा है। इससे रेलवे को तगड़ा झटका लगा है। गुटखा के दाग साफ करने के लिए रेलवे को करोड़ों रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
भारतीय रेलवे ट्रेनों पर गुटखा-थूकने वाले दागों को साफ करने के लिए हर साल करीब 1200 करोड़ रुपये और लाखों लीटर पानी खर्च करता है।
कोरोना काल में भी साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की गई, लेकिन गुटखा खाकर थूकने की आदत में कोई बदलाव नहीं आया है।
कोरोना काल में भी साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की गई, लेकिन गुटखा खाकर थूकने की आदत में कोई बदलाव नहीं आया है।